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“कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन” —
हम सबने बचपन से यह गीता का श्लोक सुना है।
कर्म करते रहो, फल की चिंता मत करो—
इस सत्य का अनुभव जीवन में हर कदम पर होता है।
यह कहानी भी कर्म, तपस्या और ज्ञानदान के संकल्प से जन्मी एक प्रेरणादायी सफलता यात्रा है—
जिसे हम अपने शब्दों में आपके सामने प्रस्तुत करते हैं।
साल 2007 में मन में एक विचार जागा—
“दुनिया का सबसे बड़ा दान है ज्ञानदान।”
इसी महान उद्देश्य के साथ हमने गुरुकुल पद्धति पर आधारित एक विद्यालय खोलने का निर्णय लिया।
लेकिन जानकारी न होने के कारण, एक निजी एजेंट को काम दिया—जिसने धोखा दिया, और हमारा पैसा भी चला गया।
इसके बाद पूरा ध्यान शिक्षा क्षेत्र पर केंद्रित कर दिया।
धुळे जिले से नाशिक का रुख किया। यहाँ कई क्षेत्रों में काम किया, फिर विवाह हुआ।
नाशिक की शिक्षा और अपने गाँव की शिक्षा में अंतर साफ दिखाई देता था—
लेकिन शिक्षा के प्रति लगन और सपना मन में लगातार जीवित रहा।
2014 में स्कूल शुरू करने का विचार फिर जागा।
मैंने यह बात अपनी पत्नी श्रीमती मनीषा हिरे से साझा की।
उन्होंने तुरंत सहयोग देने की इच्छा जताई।
9 जून 2014 — मेरी पत्नी के जन्मदिन के शुभ अवसर पर
“The Kids Campus Pre-School” की स्थापना हुई।
स्कूल का सजावट स्वयं की—
सरल लेकिन आकर्षक…
पंपलेट, बैनर, रंगीन बोर्ड, और एक छोटा सा शुभ मुहूर्त जिसमें माता-पिता और परिजन उपस्थित थे।
स्कूल का प्रचार तो हुआ, लेकिन—
✔ शिक्षकों के वेतन देने के लिए पैसा नहीं
✔ आया (helpers) रखने के लिए पैसा नहीं
✔ प्रवेश के लिए पूछताछ होने लगी, लेकिन पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं
ऐसे समय में—
मेरी पत्नी ने खुद शिक्षक और आया, दोनों का कार्य संभाला।
पहले वर्ष में सिर्फ 3 बच्चे—
जिनमें से एक हमारी बेटी भी थी।
लेकिन उनकी शिक्षण पद्धति इतनी अच्छी थी कि बच्चे स्कूल आने का आनंद लेने लगे।
माता-पिता का विश्वास बढ़ा, और स्कूल ने गति पकड़ना शुरू किया।
दूसरे वर्ष से:
• छात्रों की संख्या बढ़ी
• शिक्षक और आया स्वयं काम करने को तैयार हुए
• पाठ्यक्रम हमने स्वयं तैयार किया
दिन-ब-दिन विद्यालय की विश्वसनीयता बढ़ती गई।
प्रवेश तेजी से बढ़े और हम नई ऊंचाइयां छूते गए।
सफलता मिलते ही बाज़ार में प्रतिद्वंद्वी भी बनते हैं।
हमारे स्कूल के नाम का दुरुपयोग शुरू हुआ।
इसलिए स्कूल का नाम बदलकर हमारी बेटी के नाम पर रखा गया—
“Samruddhi English Medium Pre-School”
सबकुछ ठीक चल रहा था कि आया वैश्विक संकट—कोरोना काल।
सब कुछ ठप हो गया।
बच्चों की उम्र कम होने के कारण ऑनलाइन शिक्षा का बहुत कम प्रतिसाद मिला।
फिर भी हमने गीता के संदेश को याद रखा—
“कर्म करते रहो, फल की इच्छा मत करो।”
समय बदला, परिस्थिति सुधरी…
और स्कूल जो 3 बच्चों से शुरू हुआ था,
आज दो शाखाओं तक पहुँच चुका है।
हमारी आकांक्षा है—
🌟 पूरे महाराष्ट्र में स्कूलों की श्रृंखला स्थापित करना
🌟 फिर पूरे देश में विस्तार करना
हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि शिक्षा प्रणाली निरंतर समृद्ध और उज्ज्वल होती रहे।
डिजिटल और IT क्षेत्र में उनके अद्वितीय योगदान को देखते हुए, Reseal.in और India Fashion Icon Magazine ने
अमर एम. जाधव और पूनम ए. जाधव को प्रतिष्ठित पुरस्कारों के लिए चयनित किया है:
• Maharashtra Business Icon 2025
• Maharashtra Style Icon 2025
• Maharashtra Fashion Icon 2025
यह मान्यता उनके नवाचार, नेतृत्व और डिजिटल प्रगति के प्रति समर्पण को दर्शाती है।
इस प्रतिष्ठित समारोह में सम्मिलित होंगे तीन प्रमुख अतिथि:
⭐ वर्षा उसगांवकर – बॉलीवुड अभिनेत्री
⭐ सोनाली कुलकर्णी – भारतीय अभिनेत्री
⭐ प्रार्थना बेहेरे – भारतीय अभिनेत्री
कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है:
श्री सुधीर कुमार पाठाडे,
Founder & CEO, Sure Me Multipurpose Pvt. Ltd.
अमर एम. जाधव और पूनम ए. जाधव को इस सम्मान के लिए हार्दिक बधाई!
उनका नवाचार, नेतृत्व और IT उद्योग में योगदान
उन्हें ठाणे का गौरव और महाराष्ट्र के व्यापारिक समुदाय का चमकता सितारा बनाता है।







