




ट्रंप सरकार ने भारत पर 26% टैरिफ लगाया था, अब नई ट्रेड डील के तहत टैरिफ में राहत की उम्मीद, भारत भी UK जैसे देशों की लिस्ट में शामिल हो सकता है।
वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अगुवाई वाली सरकार एक बार फिर वैश्विक टैरिफ वॉर को हवा दे रही है। अब तक लगभग 20 देशों को टैरिफ लेटर भेजे जा चुके हैं, जिनमें जापान, दक्षिण कोरिया, बांग्लादेश, ब्राजील और म्यांमार जैसे देश शामिल हैं।
अब बारी है भारत की। हालांकि इस बार उम्मीद की जा रही है कि भारत पर टैरिफ की दरें कम होंगी, और अमेरिका के साथ एक नई व्यापारिक समझौता (Trade Deal) जल्द ही फाइनल हो सकती है।
भारत पर पहले कितना टैरिफ था?
अप्रैल 2025 में, अमेरिका ने भारत पर 26% का रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। यह दर भारत द्वारा अमेरिका पर लगाए गए औसतन 52% टैरिफ की तुलना में आधी थी।
इस फैसले को ट्रंप ने “डिस्काउंट टैरिफ” कहते हुए यह तर्क दिया था कि भारत के साथ बेहतर व्यापारिक संबंध बनाए रखना अमेरिका के हित में है।
अब क्या है भारत-अमेरिका की स्थिति?
अब तक की रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत और अमेरिका के बीच एक ट्रेड डील लगभग फाइनल हो चुकी है। इस डील के तहत भारत पर 20% तक का टैरिफ लगने की संभावना जताई जा रही है, जो पहले के मुकाबले 6% कम है।
रिपोर्टों के अनुसार, भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में आ सकता है, जो ट्रंप के टैरिफ लेटर से बचने में सफल रहे हैं, जैसे कि यूनाइटेड किंगडम।
ट्रंप का क्या कहना है?
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस हफ्ते दिए एक इंटरव्यू में कहा:
“हम उन देशों पर 15 से 20 प्रतिशत का टैरिफ लगाने के बारे में सोच रहे हैं, जो अब तक अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर सहमत नहीं हुए हैं। लेकिन भारत अब समझौते के पहले से कहीं ज्यादा करीब है।”
इस बयान से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि भारत के लिए शर्तें अनुकूल हो सकती हैं, खासकर अन्य देशों के मुकाबले जहां टैरिफ दरें 50% तक पहुंच चुकी हैं।
किन देशों पर लग चुका है भारी टैरिफ?
ट्रंप प्रशासन पहले ही:
१. ब्राजील और म्यांमार पर 50% टैरिफ
२. वियतनाम और फिलीपींस पर 20% टैरिफ लगा चुका है।
भारत फिलहाल इस लहर से बचने की स्थिति में है और यह नई ट्रेड डील भारत की मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात आधारित कंपनियों के लिए बड़ी राहत हो सकती है।
भारत को क्या होगा फायदा?
१. भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा में राहत
२. डॉलर के मुकाबले रुपये को मिलेगा स्थायित्व
३. ऑटो, फार्मा और टेक्सटाइल सेक्टर को मिल सकती है सीधी राहत
४. भारत को अमेरिकी निवेश आकर्षित करने में सहूलियत
अगर यह डील तय हो जाती है, तो भारत अमेरिका के साथ टैरिफ वॉर से बचने वाला प्रमुख देश बन जाएगा। अब निगाहें 18 जुलाई की संभावित घोषणा और दोनों देशों के बीच आधिकारिक व्यापारिक बयान पर टिकी हैं।
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