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    LinkedIn रिपोर्ट: भारत लौटने वाले प्रोफेशनल्स में केरल सबसे आगे

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    रिपोर्ट का परिचय: केरल में ‘टैलेंट रिटर्न’ की नई कहानी

    केरल लंबे समय से प्रवासी भारतीयों (NRIs) का गढ़ माना जाता रहा है। ग़ल्फ देशों और यूरोप-अमेरिका तक फैले लाखों केरलवासी राज्य की अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका निभाते हैं। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। Skill Kerala Global Summit 2025 के दौरान प्रस्तुत की गई LinkedIn Talent Insights रिपोर्ट ने एक चौंकाने वाला लेकिन सकारात्मक तथ्य उजागर किया है—विदेशों में काम करने वाले कुशल और दक्ष पेशेवर बड़ी संख्या में वापस केरल लौट रहे हैं।

    रिपोर्ट को केरल डेवलपमेंट एंड इनोवेशन स्ट्रैटेजिक काउंसिल (K-DISC) ने पेश किया। इसमें साफ़ कहा गया है कि पिछले पाँच वर्षों में केरल में ‘टैलेंट रिटर्न’ की दर में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। यह प्रवृत्ति न केवल सामाजिक दृष्टि से, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे राज्य के भीतर स्टार्टअप कल्चर, उद्यमिता और तकनीकी नवाचार को नया बल मिल रहा है।

    वापसी की संख्या और स्रोत

    रिपोर्ट में बताया गया कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से लगभग 9,800 पेशेवर केरल लौट चुके हैं—यह सबसे बड़ा हिस्सा है। इसके बाद सऊदी अरब और ब्रिटेन से क्रमशः 1,600 से अधिक, कतर से 1,400+, और संयुक्त राज्य अमेरिका से 1,200+ पेशेवर लौटे हैं।

    इसके अलावा घरेलू प्रवासन (regional migration) के तहत भी लोग लौट रहे हैं—जैसे कि कर्नाटक से लगभग 7,700, उसके बाद क्रमशः तमिलनाडु, महाराष्ट्र, तेलंगाना और हरियाणा से भी पेशेवर वापस आए हैं।

    3. लौटने के कारण

    LinkedIn रिपोर्ट बताती है कि लौटने वाले पेशेवर आईटी, स्वास्थ्य सेवा, पर्यटन और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में रोजगार पाने की उम्मीद रखते हैं; कई लोग व्यापार शुरू करने के लिए भी लौट रहे हैं। मुख्य कारण हैं:

    • परिवार के करीब रहना

    • स्थिरता और बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस

    • अक्सर ‘उच्च दबाव’ वाले मेट्रो या विदेशी नौकरी की तुलना में बेहतर परिस्थितियाँ

    4. क्षमता और कौशल का लाभ

    यूएई जैसे देशों से लौटे लगभग 52% लौटे पेशेवर ‘व्यवसाय संचालन, वित्त और उद्यमिता’ जैसे क्षेत्र में कौशल और विशेषज्ञता ला रहे हैं। वहीं, घरेलू प्रवासन से लौटने वालों ने प्रोडक्ट प्रबंधन, शोध और शिक्षा जैसे तकनीकी-रचनात्मक क्षेत्रों में योगदान दिया है। यह केरल के नवाचार और तकनीकी पारिस्थितिकी में सुधार के संकेत हैं।

    5. कुडील और तरक्की का संकेत

    रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि पिछले पाँच वर्षों में केरल की कुल पेशेवर प्रतिभा पूल में 172% वृद्धि हुई है—इस अवधि में यह वृद्धि बहुत उल्लेखनीय है। राज्य की प्रतिभा पूल में केरल भारतीय राज्यों में नौवें स्थान पर है।

    6. भविष्य के लिए नीतिगत दिशा

    K-DISC का कहना है कि यह रिपोर्ट केरल के भविष्य की नीति निर्धारण—जैसे प्रतिभा विकास, वैश्विक साझेदारी और उभरते उद्योगों में निवेश—में मार्गदर्शन करेगी। इससे राज्य के युवा और अनुभवी कार्यबल को जोड़ने में मदद मिलेगी।

     यह वाकई ‘बिग वैन’ है?

    केरल में वैश्विक और क्षेत्रीय दोनों स्तर पर पेशेवरों की वापसी का रुझान बड़ी उम्मीद जगाता है। लेकिन यह कागज़ों पर जितना आशाजनक लगता है, असल में उतना ही चुनौतियों भरा भी है।

    रोजगार पैनल और पुनर्निवेशन की चुनौतियाँ

    Gulf Returnees की एक पॉलिटिकल और सामाजिक समस्या यह है कि वे अक्सर घरेलू बाजार में उचित स्थान नहीं पा पाते—न तो उनकी तकनीकी क्षमताएं भारतीय परिस्थितियों में फिट होती हैं, न ही स्थानीय नेटवर्क उन्हें सहारा देते हैं। एक अध्ययन में बताया गया कि जैसे ब्यूरोक्रेटिक अड़चने, वित्तीय अस्थिरता और कौशल का मेल नहीं होने जैसी समस्याएँ इनकी पुनःस्थापना में बड़ी बाधा लग सकती हैं

    केरल सरकार ने पहले से ही NDPREM परियोजना जैसी पहलों (7,000+ वापसीकर्ताओं को लाभ) और NAME जैसी योजनाओं (रिटर्नees को रोजगार गारंटी) के माध्यम से कदम उठाए हैं। यह कहना कि वे सक्रिय रूप से प्रभावी नीति दिशा में काम कर रहे हैं, गलत नहीं होगा। फिर भी, इसकी हिस्सेदारी और प्रभाव में अभी विस्तार की आवश्यकता है।

    LinkedIn रिपोर्ट उज्जवल संकेत देती है कि केरल एक बार फिर ‘टैलेंट हब’ बनने की ओर बढ़ रहा है—जहाँ विदेशों से लौटे पेशेवर अपनी कौशल क्षमता, अनुभव और नेटवर्क के साथ शामिल हो रहे हैं।

    • UAE, सऊदी अरब, ब्रिटेन, कतर और अमेरिका प्रमुख स्रोत हैं।

    • 52% लोग व्यापार और वित्तीय कौशल लेकर आ रहे हैं।

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