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  • बांके बिहारी मंदिर तोशाखाना विवाद गहराया: संत करेंगे आमरण अनशन, बोले- सनातन धर्म की संपत्ति चोरी हुई है

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    मथुरा के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर का तोशाखाना विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। मंदिर की संपत्ति और खजाने के गायब होने की खबरों ने संत समाज में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। आरोप है कि मंदिर के तोशाखाने में रखी कीमती वस्तुएं, दान और आभूषण बिना किसी रिकॉर्ड के लापता हो गए हैं। इस पूरे मामले की CBI जांच की मांग करते हुए संतों ने अब आमरण अनशन पर बैठने का एलान किया है।

    वृंदावन स्थित इस ऐतिहासिक मंदिर से करोड़ों रुपये की दान राशि और कीमती चांदी-सोने के आभूषण हर साल जमा होते हैं। इनकी देखरेख मंदिर प्रशासन और ट्रस्ट के जिम्मे होती है। लेकिन हाल के दिनों में मंदिर की संपत्ति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। संतों का कहना है कि सनातन धर्म की धरोहर को लूटने की साजिश की जा रही है और मंदिर प्रशासन इसमें मिलीभगत कर रहा है।

    संतों के एक समूह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर पूरे मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उनका आरोप है कि मंदिर का “तोशाखाना” — यानी भगवान के लिए दान की गई बहुमूल्य वस्तुएं और आभूषण — में से कई वस्तुएं रहस्यमय तरीके से गायब हैं।

    वृंदावन के प्रसिद्ध संत श्रीरामदास महाराज ने कहा,

    “बांके बिहारी मंदिर सिर्फ एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि हमारी आस्था का केंद्र है। इस मंदिर की संपत्ति सनातन धर्म की धरोहर है, जिसे चोरी किया जा रहा है। अब समय आ गया है कि इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी CBI से कराई जाए, ताकि सच्चाई सबके सामने आ सके।”

    उन्होंने आगे कहा कि यदि सरकार इस मामले में शीघ्र कार्रवाई नहीं करती, तो वह और कई अन्य संत आमरण अनशन शुरू करेंगे। उनका कहना है कि मंदिर की संपत्ति को बचाने के लिए उन्हें संघर्ष करना ही होगा, क्योंकि यह केवल संपत्ति का नहीं बल्कि आस्था और परंपरा की सुरक्षा का सवाल है।

    सूत्रों के अनुसार, संतों ने आरोप लगाया है कि मंदिर प्रशासन ने वर्षों से प्राप्त दान और तोशाखाने की वस्तुओं का सही लेखा-जोखा प्रस्तुत नहीं किया है। कई दानदाताओं ने भी इस पर सवाल उठाए हैं कि मंदिर में उनके द्वारा चढ़ाई गई कीमती वस्तुएं अब वहां मौजूद क्यों नहीं हैं।

    दूसरी ओर, मंदिर प्रशासन ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि मंदिर के तोशाखाने में जो भी वस्तुएं हैं, वे सुरक्षित हैं और किसी भी प्रकार की चोरी का मामला गलत प्रचार है। एक ट्रस्टी ने बताया,

    “संतों द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं। मंदिर की हर संपत्ति का रिकॉर्ड रखा जाता है और कोई भी चाहें तो जांच कर सकते हैं। यह विवाद केवल राजनीति से प्रेरित है।”

    हालांकि, मामला अब धार्मिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर गरमा गया है। वृंदावन और मथुरा के कई संतों ने इस मुद्दे पर एकजुटता दिखाई है और कहा है कि अगर सरकार ने जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो आंदोलन को पूरे प्रदेश में फैलाया जाएगा।

    मंदिर के बाहर भी माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। भक्त और स्थानीय लोग इस विवाद से व्यथित हैं। उनका कहना है कि बांके बिहारी जी के नाम पर राजनीति या स्वार्थ नहीं होना चाहिए। मंदिर की पारदर्शिता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

    धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल संपत्ति का नहीं बल्कि विश्वास और धार्मिक प्रबंधन की विश्वसनीयता से जुड़ा है। अगर यह मामला बिना जांच के छोड़ दिया गया, तो इससे मंदिरों में लोगों की आस्था पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

    राज्य सरकार ने फिलहाल इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, स्थानीय प्रशासन को रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, संत समाज अब अपने आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर रहा है।

    बांके बिहारी मंदिर, जो ब्रज भूमि की आस्था का प्रतीक है, अब एक ऐसे विवाद में उलझ गया है जिसने करोड़ों भक्तों को चिंतित कर दिया है। एक तरफ संतों की धार्मिक भावना आहत है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासन अपनी सफाई दे रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वास्तव में इस विवाद की जांच CBI के हाथों में जाती है या फिर यह मामला राजनीति और आरोपों के भंवर में ही फंसकर रह जाता है।

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