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नासिक के टापोवन क्षेत्र में पेड़ों को बचाने के लिए नागरिकों का आंदोलन उभरकर सामने आया है। यह हरित-क्षेत्र, जो गोडावरी नदी के किनारे 150 एकड़ में फैला है और लंबे समय से शहर का “हरीतिमा दिल” माना जाता है, एक बार फिर सुर्खियों में है। स्थानीय लोग “वृक्ष बचाओ आंदोलन” के लिए रोज़ाना बड़ी संख्या में इकट्ठा हो रहे हैं और पेड़ों के साथ प्रदर्शन तथा रैलियाँ करते हुए उन्हें काटने का विरोध कर रहे हैं।
साधु ग्राम और पेड़ काटने का प्रस्ताव
नासिक नगर निगम (NMC) ने सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए साधु ग्राम बनाए जाने का प्रस्ताव रखा था, जिसमें नवनिर्मित हॉटल और अस्थाई आवास शामिल हैं। इसी योजना के लिए लगभग 1,700 से अधिक पेड़ों को हटाने का सुझाव दिया गया था, जिससे उग्र प्रतिकर्षण उत्पन्न हुआ।
स्थानीय नागरिक, पर्यावरणवादी और सामाजिक कार्यकर्ता इस प्रस्ताव के खिलाफ सख़्त खड़े हैं, उन्होंने कहा कि पेड़ों की कटाई पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँचा सकती है और टापोवन की मौलिक हरियाली को नष्ट कर देगी।
राजनीतिक और सामाजिक समर्थन
टापोवन पेड़ों को बचाने की लड़ाई ने राजनीतिक मोड़ भी ले लिया है। शिवसेना (UBT) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने इस मुद्दे पर भाजपा से दूरी बनाते हुए टापोवन के पेड़ों को बचाने का वादा किया है। कई स्थानीय उम्मीदवारों ने चुनावी समर्थन के रूप में पेड़ों की रक्षा की अफिडेविट पर हस्ताक्षर किए हैं।
नीति-निर्माताओं का रुख
अधिकारी और निगम के प्रतिनिधि बताते हैं कि केवल आवश्यक पेड़ों को हटाया जाएगा, और अधिकारियों के संयुक्त सर्वेक्षण के बाद यह निर्णय लिया जाएगा कि कितने वृक्ष हटाने पड़ेंगे। NMC आयुक्त ने भी पर्यावरण और विकास का संतुलन बनाए रखने की बात कह कर विवाद पर अपने रुख़ को स्पष्ट किया है।
स्थिति सार — क्या हो रहा है?
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नागरिकों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं की ओर से पेड़ों की कटाई के खिलाफ बड़ा आंदोलन जारी है।
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नासिक नगर निगम की साधु ग्राम निर्माण योजना को विरोध का मुख्य कारण बताया जा रहा है।
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राजनीतिक दल इस मुद्दे को चुनावी वादों के रूप में ले रहे हैं, विशेषकर पालिका चुनावों के मद्देनज़र.








