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देश में नशा और मादक पदार्थों के खिलाफ आगामी तीन वर्षों तक चलने वाला एक व्यापक राष्ट्रीय अभियान 31 मार्च, 2026 से शुरू होगा, इसकी घोषणा केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को की। यह ऐलान उन्होंने नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) की 9वीं शीर्ष-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए किया।
अमित शाह ने कहा कि इस अभियान का लक्ष्य “नशा-मुक्त भारत” बनाना है, जिससे देश की युवा पीढ़ी को मादक पदार्थों के जोखिम से सुरक्षित रखा जा सके। उन्होंने सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को निर्देश दिया है कि वे 31 मार्च तक नशा समस्या से निपटने के लिए विस्तृत रोडमैप तैयार करें और उसकी लागू-स्थिति की समयबद्ध समीक्षा करें।
शाह ने यह भी कहा कि सरकार की नीति स्पष्ट है कि नशीले पदार्थ बनाने और बेचने वालों के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जाएगी, और साथ ही मादक द्रव्यों की गिरफ्तारी, उनके नेटवर्क को तोड़ना और आरोप-पत्र पेश करने तथा दोषसिद्धि की प्रक्रियाओं को तेज़ करना प्रमुख लक्ष्य होंगे।
उन्होंने बैठक में उपस्थित राज्यों के डीजीपी और अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक राज्य को अपनी रणनीतियाँ तैयार करनी चाहिए और जब्त किये गए मादक पदार्थों का समय पर नष्टिकरण सुनिश्चित करना चाहिए। गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि नशा सिर्फ़ अपराध या कानून-व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह “नार्को-आतंकवाद” से भी जुड़ा है, जिसका उद्देश्य भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान पहुँचाना है।
बैठक के दौरान अमित शाह ने अमृतसर में मादक पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो (NCB) के नए कार्यालय का भी उद्घाटन किया। अभियान के दौरान जनता में जागरूकता बढ़ाने, आपूर्ति-श्रृंखला को तोड़ने, मांग में कमी लाने और मादक पदार्थों के शिकार लोगों के लिए मानवीय सहायता प्रदान करने जैसे बहुआयामी प्रयास शामिल होंगे।
अमित शाह ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 11 वर्षों में मादक द्रव्यों के खिलाफ जारी जंग में काफी सफलता मिली है, और NCORD के पुनर्गठन के बाद इस समस्या से निपटने का मार्ग और स्पष्ट हुआ है।
यह पहल भारत की युवा शक्ति की सुरक्षा और सामाजिक स्वास्थ्य की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, और सरकार इसके कार्यान्वयन के लिए समन्वित प्रयास करेगी।








