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नाशिक में तपोवन क्षेत्र में प्रस्तावित वृक्ष तोडी को लेकर गहरा विरोध और राजनैतिक बहस चल रही है। इस मुद्दे ने स्थानीय राजनीति में इतना चर्चित रूप ले लिया है कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों — शिवसेना (ठाकरे गुट) के आदित्य ठाकरे और शिवसेना (शिंदे गुट) के श्रीकांत शिंदे — दोनों ने पर्यावरण प्रेमियों के साथ मिलकर झाड़ों की कटाई का विरोध किया है। यह दुर्लभ एकता न केवल आम नागरिकों बल्कि दोनों पक्षों के राजनेताओं को भी एक ही मुकाम पर ला खड़ी हुई है।
पर्यावरण के लिए आवाज़
यह विवाद तपोवन वृक्ष तोडी को लेकर है, जहाँ कुछ विकास परियोजनाओं, जैसे साधुग्राम और अन्य योजनाओं के कारण 1,700 से अधिक दर्जनों वृक्ष हटाने की योजना बनाई गई थी, जिससे पर्यावरण प्रेमियों सहित आम लोगों में गहरा आक्रोश है।
आदित्य ठाकरे, जो पहले ही इस मुद्दे पर खुलकर विरोध कर चुके हैं, उन्होंने इस वृक्ष तोडी को रोकने और पर्यावरण की रक्षा के लिए वैकल्पिक समाधान खोजने की अपील की थी। इसी मुद्दे का समर्थन अब श्रीकांत शिंदे ने भी किया है, जिन्होंने स्पष्ट किया कि वे “पर्यावरण प्रेमियों के साथ हैं” और “पुराने पेड़ों को नहीं काटना चाहिए” जैसी बात कही है।
राजनीतिक विरोध के बावजूद एकजुटता
राजनीतिक रूप से दोनों पक्षों के बीच काफी मतभेद और टकराव होते रहे हैं, विशेषकर शिवसेना ठाकरे गुट और शिंदे गुट के बीच, लेकिन तपोवन मामले ने दोनों को एक सामान्य पर्यावरण हित में एकजुट कर दिया है — यह न केवल स्थानीय समुदाय के लिए आशा की बात है, बल्कि यह भी दिखाता है कि प्रकृति के मुद्दों पर पार्टियों के बीच भी समझौता संभव है.
बढ़ता पर्यावरणीय आंदोलन
इस मुद्दे ने स्थानीय निवासियों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं और राजनेताओं के बीच एक मजबूत “Save Tapovan” आंदोलन को जन्म दिया है, जहां हर वर्ग इस बात पर जोर दे रहा है कि वृक्ष तोडी को बिना ठोस विकल्प के अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।








