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भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने व्यापार समझौते के अलावा एक व्यापक सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी शुरू करने की दिशा में बड़े कदम उठाए हैं। यह घोषणा 26 जनवरी को 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान होने वाले भारत-EU शिखर सम्मेलन से पहले की गई है, जिसमें EU के शीर्ष नेता भारत के मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
गणतंत्र दिवस से पहले बड़ा संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 जनवरी को नई दिल्ली में यूरोपीय संघ के नेताओं व यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा तथा यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन का स्वागत करेंगे। उल्लेखनीय है कि यह पहली बार है जब EU के प्रमुख गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि होंगे, जो द्विपक्षीय रिश्तों में मजबूती का प्रतीक है।
व्यापार समझौता (FTA) पर प्रगति
दोनों पक्ष व्यापार समझौते यानी Free Trade Agreement (FTA) पर भी महत्वपूर्ण प्रगति कर रहे हैं। भारत तथा EU ने 24 में से 20 चैप्टर्स पर मंथन पूरा कर लिया है, हालांकि कृषि जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को समझौते में शामिल नहीं करने पर सहमति बनी है।
वाणिज्य सचिव के अनुसार, यह FTA दोनों पक्षों के बीच सबसे बड़े व्यापार समझौते में बदल सकता है और यह समझौता लंबी बातचीत के बाद निष्कर्ष के करीब है।
सुरक्षा तथा रक्षा सहयोग पर ध्यान
इस नए साझेदारी ढांचे का लक्ष्य रक्षा तथा सुरक्षा क्षेत्रों में भी सहयोग को विकसित करना है। इसके अंतर्गत सहयोगात्मक रक्षा प्रयास, साझा संकट प्रबंधन, सीमा सुरक्षा, साइबर रक्षा और आधुनिक सैन्य तकनीकी क्षमता निर्माण शामिल होने की संभावना है।
सरकार यह भी संभावित कर रही है कि भारत EU के Permanent Structured Cooperation (PESCO) जैसे सुरक्षा ढांचे में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें, जिससे संयुक्त रक्षा परियोजनाओं और क्षमता विकास को बढ़ावा मिलेगा।
रणनीतिक साझेदारी का व्यापक महत्व
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम भारत और EU के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगा। व्यापार के अलावा सुरक्षा और रक्षा में सहयोग दोनों के लिए भूराजनीतिक प्रतिस्पर्धा, विशेषकर एशिया-प्रशांत और यूरोपीय सुरक्षा परिभाषा के मद्देनजर, अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।








