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बॉडमिंटन इंडिया ओपन 2026 (Super 750) में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने निराश किया क्योंकि कोई भी घरेलू खिलाड़ी क्वार्टरफाइनल से आगे नहीं पहुंच पाया। यह टूर्नामेंट भारतीय बैडमिंटन के लिये विश्व चैंपियनशिप से पहले महत्वपूर्ण अभ्यास माना जा रहा था, लेकिन परिणाम उम्मीद के अनुरूप नहीं रहे।
सबसे आगे थे लक्ष्या सेन (Lakshya Sen), जिन्होंने क्वार्टरफाइनल तक पहुंच बनाई, लेकिन वहां चीन/ताइपे के Lin Chun-Yi के खिलाफ हार से उनकी राह रुक गई। अन्य दिग्गज खिलाड़ी जैसे किदाम्बी श्रीकांत और HS प्रन्नॉय ने भी मुश्किल मुकाबलों में हार का सामना किया। इसी तरह सतविक साईराज रंकिरेड्डी और चिराग शेट्टी का पुरुष डबल्स अभियान भी दूसरे दौर में खत्म हो गया।
भूमिका और कारण:
टूर्नामेंट में कई बार खेल की परिस्थितियों और आंतरिक समस्याओं पर भी चर्चा रही — जिसमें धुंध/प्रदूषण, कोर्ट की स्थिति और संगठनात्मक चुनौतियाँ जैसे मुद्दों पर खिलाड़ियों और विशेषज्ञों ने प्रतिक्रिया दी। कुछ विदेशी खिलाड़ियों ने दिल्ली की हवा गुणवत्ता के बारे में चिंता जताई है, जिससे मैचों में सांस की तकलीफ और खेल प्रदर्शन प्रभावित हुआ।
हालांकि कुछ यूथ खिलाड़ियों ने सकारात्मक संकेत दिखाए — जैसे 17-साल की तन्वी शर्मा ने विश्व नंबर 2 वांग जिनी को दो गेम तक कड़ी टक्कर दी — लेकिन कुल मिलाकर भारतीय खिलाड़ियों की प्रदर्शन गहराई में पहुँचने की क्षमता इस बार स्पष्ट रूप से कमजोर दिखी। इससे बायडमिंटन एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (BAI) और प्रशिक्षकों के लिये खिलाड़ियों की तैयारी और प्रदर्शन पर पुनर्विचार के सवाल उठ रहे हैं।
यह टूर्नामेंट भारत में आयोजित होने वाला एक उच्च श्रेणी का विश्व स्तर प्रतियोगिता है, और इससे अगले महत्त्वपूर्ण प्रायोगिक चरण — बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप्स (World Championships) — के लिये भारतीय चुनौती पर भी कई महत्वपूर्ण संकेत मिले हैं।








