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भारत की महत्वाकांक्षी समुद्रयान (Samudrayaan) गहरे समुद्र अन्वेषण परियोजना में तेजी आई है और पहला परीक्षण गोता मई 2026 में लगभग 500 मीटर की गहराई पर किया जाएगा। यह कदम भारत को गहरे समुद्र में मानव‑युक्त उपसागरान्वेषण के क्षेत्र में दुनिया के चुनिंदा देशों की कतार में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
इस मिशन को नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी (NIOT), चेन्नई द्वारा विकसित मैत्स्य‑6000 (Matsya‑6000) नामक मानव‑युक्त सबमर्सिबल वाहन के माध्यम से अंजाम दिया जा रहा है। यह 25 टन वजन वाला वाहन तीन व्यक्ति को 12 घंटे तक ऑपरेशनों के लिए ले जा सकेगा और इमरजेंसी में 96 घंटे तक जीवित रहने की क्षमता रखता है।
NIOT के निदेशक प्रो. बलाजी रामकृष्णन ने बताया कि कुछ प्रारंभिक कम‑गहराई परीक्षणों को छोड़कर सीधे 500 मीटर की गहराई पर गोता लगाने की योजना पर काम तेज किया जा रहा है ताकि प्रणाली की वास्तविक‑परिस्थिति में क्षमता, जीवन‑समर्थ प्रणाली और नेविगेशन जैसे सिस्टमों का परीक्षण हो सके।
यह समुद्रयान मिशन भारत सरकार के दीप ओशन मिशन (Deep Ocean Mission) के तहत विकसित किया जा रहा है, जिसकी कुल लागत लगभग ₹4,077 करोड़ है। इस मिशन का अंतिम लक्ष्य 6,000 मीटर तक मानव‑युक्त गोता लगाना है, जिससे वैज्ञानिक समुद्री जैव विविधता, गहन भौगोलिक मानचित्रण और संसाधन खोज जैसे महत्वपूर्ण कार्य कर सकेंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार, समुद्रयान मिशन से नीले अर्थव्यवस्था (Blue Economy) के क्षेत्रों में संभावनाएँ बढ़ेंगी जैसे कि सतत खनन, समुद्र‑आधारित अनुसंधान और गहरी समुद्री पर्यटन जैसी गतिविधियाँ भी विकसित हो सकती हैं।
इस कदम के साथ भारत अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और जापान जैसे देशों के साथ गहरे समुद्र में मानव‑युक्त तकनीक रखने वाले सीमित समूह में शामिल होने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।








