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महाराष्ट्र के नासिक स्थित स्कूल ऑफ आर्टिलरी ने भारतीय सेना और नौसेना के अधिकारियों के लिए ड्रोन उड़ान और संचालन प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। इस प्रशिक्षण का मकसद है आधुनिक युद्ध तकनीकों में इन बलों की दक्षता बढ़ाना, विशेषकर निगरानी, टोही और आवश्यक परिस्थितियों में लक्ष्यों पर कार्यवाही के लिए ड्रोन का प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित करना।
आयोजन का विस्तृत आयोजन: Exercise Topchi
यह ड्रोन प्रशिक्षण उसी वार्षिक अभ्यास ‘Exercise Topchi’ का हिस्सा है, जिसमें आधुनिक हथियार प्रणालियों और निगरानी तंत्रों का संयुक्त प्रदर्शन किया जाता है। इस अभ्यास में ड्रोन का इस्तेमाल दुश्मन की गतिविधियों का पता लगाने, वास्तविक समय में संचार स्थापित करने और लक्ष्य पर प्रतिक्रिया देने के तरीकों के लिए किया गया।
स्कूल ऑफ आर्टिलरी के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल एन.एस. सरना ने बताया कि इस वर्ष प्रशिक्षण में नौसेना के INS Dronacharya के अधिकारियों को भी शामिल किया गया है, जो यह दर्शाता है कि भविष्य में सभी रक्षा शाखाओं के बीच तालमेल और ड्रोन प्रशिक्षण का एकीकरण तेजी से हो रहा है।
सैनिकों और अधिकारियों के लिए व्यापक प्रशिक्षण
प्रशिक्षण केवल उच्च अधिकारियों तक सीमित नहीं है। इसमें उन जूनियर कमीशंड अधिकारियों (JCOs) एवं जवानों को भी ड्रोन संचालन, निगरानी और हथियारों से लैस अनमैंड एयरक्राफ्ट (UAV) सिस्टम के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे सीमित उपयोगकर्ताओं के बजाय फौजी स्टाफ की व्यापक क्षमता विकसित करने में मदद मिलेगी।
भविष्य के युद्ध संचालन के लिए सहयोग
Exercise Topchi के दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि आज के आधुनिक युद्धक्षेत्र में ड्रोन तकनीक सिर्फ एक सहायक उपकरण नहीं बल्कि मुख्य संचालन क्षमता का हिस्सा बन चुकी है। इसका प्रयोग न केवल निगरानी के लिए, बल्कि दुश्मन के ट्रैकिंग, मार्ग निर्देश एवं हथियारों के उपयोग में भी प्रभावी रूप से किया जा रहा है।
सामाजिक सहभागिता और प्रदर्शन
इस अभ्यास के प्रदर्शन को करीब 15,000 दर्शकों ने देखा, जिनमें भारतीय रक्षा सेवाओं के प्रशिक्षण छात्रों के साथ-साथ नेपाल आर्मी कमांड और स्टाफ कॉलेज के अधिकारियों तथा स्थानीय शिक्षा संस्थानों के विद्यार्थी भी शामिल थे। यह दिखाता है कि आधुनिक सैन्य प्रशिक्षण सिर्फ सेना के भीतर नहीं बल्कि व्यापक नागरिक एवं रक्षा शिक्षा तंत्र में भी रुचि और समर्थन प्राप्त कर रहा है।





