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वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिका में स्थित विश्व के सबसे अस्थिर ग्लेशियर “डूम्सडे ग्लेशियर” (Thwaites Glacier) में करीब 3,300 फीट गहरा ड्रिलिंग करके उसके नीचे के समुद्री हिस्से के बारे में अनूठा डेटा इकट्ठा किया है। वैज्ञानिकों की यह मिशन विशेष रूप से ग्लेशियर के सबसे कमजोर हिस्से पर केंद्रित थी, जहाँ समुद्र के गर्म पानी की वजह से बर्फ का पिघलना सबसे तेज़ होता है।
ड्रिलिंग अभियान में ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे (British Antarctic Survey) और कोरिया पोलर रिसर्च इंस्टीट्यूट की टीम शामिल थी। उन्होंने गर्म पानी का उपयोग कर करीब 1,000 मीटर (लगभग 3,300 फीट) की बोर-होल बनाई, जिससे पहली बार इस विशाल ग्लेशियर के नीचे के महासागरीय तापमान और प्रवाह का डेटा सीधे प्राप्त हुआ।
हालांकि मिशन का अंतिम लक्ष्य — लंबे समय तक काम करने वाले मॉनिटरिंग यंत्रों को ice shelf के नीचे स्थापित करना — तकनीकी वजहों से सफल नहीं हो सका और उपकरणों में फंसने के कारण टीम को लौटना पड़ा। लेकिन वैज्ञानिकों ने अब तक भी दुर्लभ समुद्री माप एकत्रित कर लिए हैं, जो ग्लेशियर के व्यवहार और समुद्र के गर्म पानी के प्रभाव को समझने में मदद करेंगे।
थ्वाइट्स ग्लेशियर, जिसे “डूम्सडे ग्लेशियर” कहा जाता है, अंटार्कटिका में एक विशाल बर्फ़ का हिस्सा है और इसका वैश्विक समुद्र-स्तर पर असर अत्यधिक महत्वपूर्ण है। अगर यह पूरी तरह पिघलता है, तो इससे समुद्र का स्तर कई सेंटीमीटर बढ़ सकता है, जिससे तटीय शहरों को गंभीर खतरे का सामना करना पड़ सकता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार अभी उपलब्ध डेटा उनके मॉडल और भविष्य की समुद्र-स्तर बढ़ोतरी की भविष्यवाणी को और ज़्यादा सटीक बनाने में सहायक होगा, जिससे वैश्विक समुद्र स्तर के जोखिम और प्रभाव को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा।








