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भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने आज एक बड़ा निर्णय लेते हुए डिजिटल धोखाधड़ी (digital fraud) के तहत हुए नुकसान के लिए ग्राहकों को ₹25,000 तक का मुआवजा देने का प्रस्ताव पेश किया है। यह घोषणा RBI के मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee — MPC) की बैठक में की गई, जिसमें कई उपभोक्ता-सुरक्षा उपायों को शामिल किया गया है।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि इस नई योजना का लक्ष्य डिजिटल भुगतान से जुड़ी धोखाधड़ी के जोखिम को कम करना और आम बैंक उपयोगकर्ताओं को सुरक्षा का जाल देना है। ग्राहकों को छोटे मूल्य के फ्रॉड लेन-देनों (small-value fraudulent transactions) में हुए नुकसान के लिए ₹25,000 तक, या वास्तविक नुकसान के हिसाब से 85% तक (जो भी कम हो), मुआवजा मिल सकेगा। यह व्यवस्था पहली बार होने वाले फ्रॉड मामलों पर बिना किसी कठोर सवाल-जवाब के लागू होगी।
इस मुआवजे के ढांचे में RBI, बैंक और ग्राहक तीनों की हिस्सेदारी तय की गई है — जिसमें RBI प्रमुख हिस्सा संभालेगा और बाकी बैंक तथा ग्राहक मिलकर बाँटेंगे। यह कदम डिजिटल भुगतानों में बढ़ते धोखाधड़ी के मामलों के बीच ग्राहकों के मनोबल को फिर से मजबूत करने की कोशिश है।
साथ ही RBI ने कहा है कि डिजिटल भुगतान सुरक्षा को और बढ़ाया जाएगा, जिसमें बुजुर्गों के लिए अतिरिक्त प्रमाणीकरण, ‘लैग्ड क्रेडिट’ जैसे उपाय और ग्राहक उत्तरदायित्व सीमा को स्पष्ट करना शामिल है। इसके अलावा, बैंकिंग वित्तीय उत्पादों का गलत बेचने (mis-selling) और लोन रिकवरी एजेण्ट्स के व्यवहार पर भी नए ड्राफ्ट नियम तैयार किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम डिजिटल लेन-देनों के प्रति उपभोक्ता विश्वास को बढ़ाने में मदद करेगा, और साइबर फ्रॉड से सुरक्षित बैंकिंग अनुभव देगा — खासकर उन लोगों को जिनका नुकसान ₹50,000 से कम होता है, जो लगभग 65% फ्रॉड मामलों में होता है।








