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राष्ट्रीय चुनाव के सिर्फ कुछ दिन पहले, बांग्लादेश के मैमनसिंह जिले के त्रिशाल उपजिला में एक 62 वर्षीय हिंदू चावल व्यापारी को उसके ही दुकान में धारदार हथियार से घातक रूप से हमला कर मार डाला गया। यह घटना फरवरी 9 की रात करीब 11 बजे हुई, जब राष्ट्रीय आम चुनाव 12 फरवरी 2026 को होना है, जिससे स्थानीय समुदाय में सुरक्षा और तनाव को लेकर चिंता बढ़ गई है।
हत्या की शिकार व्यक्ति की पहचान सुशेन चंद्र सरकार के रूप में हुई, जो “भाई भाई एंटरप्राइज” नामक दुकान चलाते थे और बोगर बाजार चौराहा पर स्थित थे। पुलिस के अनुसार अज्ञात हमलावर दुकान में घुसकर उन पर हमला कर दिए और फिर शटर नीचे गिराकर मौके से भाग गए। स्थानीय परिवारों और पुलिस दोनों ने बाद में शव पाया और अस्पताल ले जाते समय उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
हत्या का ढंग और संभावित कारण
पुलिस के अनुसार यह डाकुओं द्वारा घातक हमला था, जिसमें हमलावरों ने सुशेन चंद्र सरकार को धारदार हथियार से कई बार घायल किया। हत्या के बाद कुछ लाख तका नगद भी दुकान से चोरी कर लिए जाने की बात सामने आ रही है, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि लूट‑मार का भी उद्देश्य हो सकता है। हालांकि पुलिस अभी हत्या का स्पष्ट कारण नहीं बता पाई है और मामले की जांच जारी है।
त्रिशाल पुलिस स्टेशन के अधिकारी‑इन‑चार्ज मुहम्मद फिरोज होसैन ने कहा कि जांच में सभी संभावित कोणों की पड़ताल की जा रही है — जिसमें लूट, निजी विवाद और विस्तार से देखी जा रही सामाजिक‑सुरक्षा परिस्थिति भी शामिल है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि दोषियों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।
स्थानीय समुदाय में चिंता
स्थानीय व्यापारियों और पड़ोसियों ने सुशेन चंद्र सरकार को एक मृदुभाषी, शांत और मेहनती व्यक्ति बताया है, जिनका व्यापार दशकों से चलता आ रहा था। उनके परिवार और समुदाय ने शीघ्र गिरफ्तारियों और कड़ी सजा की मांग की है। इस हत्या से स्थानीय अल्पसंख्यक समुदाय में भय और असुरक्षा की भावना फैल गई है, खासकर चुनाव के ठीक पहले की संवेदनशील राजनीति और कानून‑व्यवस्था के बीच।
चुनावी पृष्ठभूमि
बांग्लादेश में चुनाव के समय सुरक्षा‑व्यवस्था और सामाजिक शांति पर भारी ज़ोर रहता है, लेकिन इस तरह की हिंसा की घटनाएँ कई लोगों में चिंता का कारण बन रही हैं। पिछले कुछ महीनों में हिंदी समुदाय के खिलाफ अलग‑अलग हिंसात्मक घटनाओं की रिपोर्टें भी सामने आई हैं, जिससे अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सवाल उठे हैं।








