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आयकर विभाग (Income Tax Department) ने नए आयकर अधिनियम, 2025 के तहत बनाये गये ड्राफ्ट नियम (Draft Income Tax Rules, 2026) और फॉर्म जारी कर दिये हैं और संबंधित पक्षकारों तथा आम जनता से 22 फरवरी 2026 तक सुझाव आमंत्रित किये हैं। यह नया ढांचा 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए कानून के लिए तैयारी का हिस्सा है।
नया कानून 60 से अधिक वर्ष पुराने Incometax Act, 1961 को बदलता है और इसे सरल, स्पष्ट और टैक्सपेयर्स‑फ्रेंडली बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
मुख्य बातें (करदाताओं के लिए)
1) नियम और फॉर्म का सरलीकरण
• पुराने 511 नियमों और 399 फॉर्म्स को 333 नियमों और 190 फॉर्म्स में संकुचित किया गया है ताकि आनुपालन और रिटर्न‑फाइलिंग तकलीफ़ें कम हों।
• ड्राफ्ट नियमों का लक्ष्य भाषा को आसान बनाना, जटिल सामग्री को हटाना और सामान्य करदाताओं के लिए समझने लायक बनाना है।
2) सुझाव देने की प्रक्रिया
• CBDT (Central Board of Direct Taxes) ने सुझाव आम जनता और पेशेवरों से चार मुख्य श्रेणियों में मांगे हैं:
– भाषा आसान बनाना
– मुकदमेबाज़ी (लिटिगेशन) घटाना
– अनुपालन बोझ कम करना
– पुराने, अप्रचलित या अनावश्यक नियमों/फॉर्म्स की पहचान
• सुझाव देने के लिए e‑Filing पोर्टल पर एक डेडिकेटेड utility खोला गया है, जहाँ नाम व मोबाइल नंबर देकर OTP सत्यापन पूरी करने के बाद राय भेजी जा सकती है।
3) बदलाव का अर्थ
• नया मसौदा नियम आयकर प्रणाली को डिजिटल‑फर्स्ट और प्रोसेस‑फ्रेंडली बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिससे रिटर्न फाइल करना और अनुपालन करना आसान होगा।
• करदाताओं तथा टैक्स पेशेवरों को यह मौका मिलता है कि वे रिपोर्ट किए गए नियमों में गलतियों, अस्पष्टताओं या आवश्यक सुधारों के बारे में अपनी राय दे सकें, जिससे अंतिम नियम अधिक संतुलित बने।
टैक्सपेयर्स को क्या बदलाव देखने को मिल सकता है?
हाल के ड्राफ्ट नियमों में यह संकेत मिल रहे हैं कि:
• ITR फॉर्म सादगी के साथ नए स्वरूप में होंगे—पूर्व में भरी जानकारी (pre-fill) व स्मार्ट इनपुट से गलती की संभावना कम होगी।
• नियमों की भाषा सरल होने से कानूनी अस्पष्टताओं का सामना कम होगा।
• अनुपालन बोझ और टेडियस प्रक्रियाओं में कमी कर उन नियमों को हटाया/संक्षिप्त किया जा रहा है जो आजकल औचित्यहीन या पुराने हैं।








