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अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) फिलहाल केवल तीन सदस्यीय “skeleton crew” (कम टीम) के साथ काम कर रहा है, क्योंकि SpaceX Crew‑12 मिशन के लॉन्च में मौसम और तकनीकी तैयारी की वजह से थोड़ी देरी हुई है। इस मिशन को अब 12 फरवरी 2026 (या आसपास) के लिए लक्ष्य बनाया गया है, जब चार नए अंतरिक्ष यात्री स्टेशन में शामिल होंगे और टीम को सामान्य सात सदस्यीय ढांचे में बहाल करेंगे।
ISS को आश्चर्यजनक रूप से लंबे समय तक छोटे दल के साथ भी सुरक्षित रूप से संचालित किया जा सकता है, लेकिन यह हमेशा के लिए नहीं है। इस दौरान शोध और रख‑रखाव गतिविधियाँ सीमित हो जाती हैं क्योंकि:
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तीन सदस्य केवल बुनियादी स्टेशन गतिविधियों को संभाल सकते हैं,
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बड़े प्रयोगों और रख‑रखाव कार्यों के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता,
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और अप्रत्याशित स्थितियों में प्रतिक्रिया क्षमताएँ कम होती हैं।
NASA ने यह भी कहा है कि यह अस्थिर अवधि ISS के संचालन में जोखिम नहीं पैदा करेगी, लेकिन वैज्ञानिक गतिविधियों की गति पर कुछ असर पड़ेगा जब तक नए चालक दल का आगमन नहीं हो जाता।
Crew‑12 लॉन्च देरी और ISS का स्टाफिंग
NASA और SpaceX ने मौसम के कारण Crew‑12 मिशन को 11 फरवरी से 12 फरवरी के लिए स्थगित कर दिया है। इससे पहले Crew‑11 का दल पहले समय से वापस व Earth लौट गया था, जो January में बनी पहली मेडिकल इवैकुएशन के कारण हुआ। उसके बाद ISS में केवल तीन ही लोग रह गए थे।
नया Crew‑12 दल NASA, ESA और Roscosmos के चार अंतरिक्ष यात्रियों से मिलकर बनेगा, जो स्टेशन पर लगभग 8–9 महीने तक रहेंगे और वैज्ञानिक प्रयोगों को जारी रखेंगे।
ISS संचालन पर प्रभाव
जब ISS में केवल तीन सदस्य होते हैं, तो कुछ गतिविधियों में मंदी आ सकती है:
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छोटे दल पर ज्यादा संचालन दबाव कम रहता है, इसलिए प्राथमिक रूप से सुरक्षा, संचार और जीवन‑समर्थन कार्यों पर ज़ोर होता है।
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कुछ वैज्ञानिक प्रयोगों और बाहरी EVA (वॉक) जैसे जटिल कामों को निलंबित या सीमित कर दिया जाता है ताकि उपलब्ध चालक दल का समय बेहतर तरीके से इस्तेमाल हो।
ISS का संचालन सुरक्षित रूप से कई सप्ताह या उससे ज़्यादा समय तक skeleton crew पर चल सकता है, जब तक नया मिशन सफलतापूर्वक लॉंच होकर टीम को बढ़ाता है।
लेकिन जैसा कि NASA और SpaceX ने बताया है, उपलब्ध तीन लोग स्टेशन को सुरक्षित रूप से बनाए रखने में सक्षम हैं, हालांकि पूर्ण टीम के बिना स्टेशन की वैज्ञानिक उत्पादकता और रख‑रखाव योजनाएँ धीमी पड़ जाती हैं।








