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Transparency International द्वारा जारी Corruption Perceptions Index (CPI) 2025 में भारत ने 182 देशों और क्षेत्रों में से 91वीं रैंक हासिल की है, जो पिछले वर्ष की 96वीं रैंक से पांच पायदान ऊपर है। यह रैंकिंग दर्शाती है कि भारत की भ्रष्टाचार-रोधी धारणा में हल्का सुधार हुआ है।
CPI एक वैश्विक सूचकांक है जो सरकारी क्षेत्र में भ्रष्टाचार की धारणा को 0 से 100 के स्तर पर आंका जाता है — 0 का मतलब अत्यधिक भ्रष्ट और 100 का मतलब बेहद पारदर्शी माना जाता है। भारत का स्कोर 39 रहा, जो पिछले वर्ष के मुकाबले एक अंक बेहतर है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भ्रष्टाचार अभी भी एक गंभीर वैश्विक समस्या है, और कई देशों में इसके खिलाफ लड़ाई अभी तक मजबूत नहीं हुई है। Asia-Pacific क्षेत्र में कई देशों ने सीमित प्रगति दिखाई है, लेकिन सम्पूर्ण वैश्विक औसत स्कोर गिरकर 42 तक पहुँच गया है, जो पिछले रिकॉर्ड से कम है।
सूची में डेनमार्क, फिनलैंड और सिंगापुर शीर्ष पर रहे, जबकि दक्षिण सूडान और सोमालिया जैसे देश सबसे निचले स्तर पर रहे हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि भारत में पारदर्शिता, जवाबदेही और भ्रष्टाचार-रोधी सुधारों को और मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि यह प्रगति स्थायी रूप से जारी रह सके।








