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संसद का बजट सत्र (Budget Session 2026–27) 10 फरवरी को दोनों सदनों — लोकसभा और राज्यसभा — में जारी रहा, जहाँ विवाद, आरोप-प्रत्यारोप और बजट पर व्यापक बहस देखने को मिली। यहाँ दिन भर की गतिविधियों के मुख्य अंश हैं:
लोकसभा में बहस और गतिरोध
🔹 लोकसभा में बजट चर्चा दोपहर 2 बजे फिर से शुरू हुई, लेकिन विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच गतिरोध और विवाद जारी रहे। विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया, उनकी कार्यशैली और विपक्षी नेताओं को बोलने से रोकने के आरोप को लेकर शुक्रवार को चल रही नाराज़गी जारी है।
🔹 नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बजट चर्चा की शुरुआत खुद न करने का निर्णय लिया, इसके पीछे उनका यह तर्क रहा कि इससे सत्तापक्ष द्वारा “पूर्वनिर्धारित व्यवधान” की संभावना बढ़ सकती है।
🔹 विपक्षी सांसदों ने केंद्रीय बजट को आलोचनात्मक रूप से देखा, आरोप लगाया कि यह सच्ची चुनौतियों का समाधान नहीं कर रहा और न ही आम जनता को पर्याप्त राहत दे रहा है।
🔹 तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी ने बजट को “नारों से भरा और समाधान में कमजोर” बताया और कहा कि इसमें वास्तविक समस्याओं को हल करने की कमी है।
राज्यसभा में बहस
🔹 राज्यसभा में बजट पर चर्चा दूसरे दिन भी जारी रही। विपक्ष ने विशेष रूप से उच्च बेरोज़गारी और आय असमानता का मुद्दा उठाया, यह कहते हुए कि देश में आर्थिक वृद्धि का लाभ अमीरों तक अधिक सिमटा हुआ है जबकि आम जन वर्ग की स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
🔹 कुछ सांसदों ने बजट को आर्थिक और सामाजिक नीतियों के लिहाज़ से विस्तार से परखा और बजट के प्रभावों पर बहस की।
संसद की कार्यवाही पर विवाद
🔹 बजट सत्र में गतिरोध और हंगामों के कारण सदन की कार्यवाही में कई बार ठहराव आया, जिससे सदन के सदस्यों और नेताओं के बीच तनावपूर्ण माहौल देखने को मिला।
🔹 विपक्ष द्वारा जोर देकर कहा गया है कि सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा डाल रही है तथा विपक्ष को पर्याप्त समय और अवसर नहीं दिया जा रहा। वहीं सत्तापक्ष का आरोप है कि विपक्ष चर्चा को आगे बढ़ने नहीं दे रहा।








