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मध्य पूर्व में जारी Iran–Israel conflict का असर अब भारत तक महसूस किया जा रहा है। ओमान तट के पास एक ऑयल टैंकर पर हुए ड्रोन हमले में मुंबई के कांदिवली निवासी 25 वर्षीय दीक्षित सोलंकी की मौत हो गई। इस घटना ने न केवल मुंबई, बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ‘MKD Vyom’ नामक मार्शल आइलैंड्स ध्वज वाले ऑयल टैंकर पर मस्कट तट से लगभग 52 नॉटिकल मील दूर विस्फोटकों से लैस एक मानवरहित सतही ड्रोन (Unmanned Surface Vessel) ने टक्कर मार दी। टक्कर के बाद जहाज के इंजन रूम में भीषण विस्फोट हुआ और आग लग गई। उस समय इंजन रूम में मौजूद दीक्षित सोलंकी की मौके पर ही मृत्यु हो गई।
ओमान के रक्षा मंत्रालय ने हमले की पुष्टि की है और सागरीय सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। हालांकि विस्फोट की तीव्रता इतनी अधिक थी कि दीक्षित को बचाया नहीं जा सका।
बीते 48 घंटों में मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच तीन भारतीय खलाशियों की मौत की आशंका जताई जा रही है। इस घटना से एक दिन पहले हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ‘MV Skylight’ नामक जहाज पर भी हमला हुआ था। उस हमले में बिहार के आशीष कुमार और राजस्थान के दलीप सिंह लापता हैं। उनकी तलाश जारी है, लेकिन परिजनों में भय और अनिश्चितता का माहौल है।
विश्लेषकों का मानना है कि ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव के चलते व्यापारिक जहाज भी लक्ष्य बन रहे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा गंभीर प्रश्नों के घेरे में आ गई है।
दीक्षित सोलंकी मूल रूप से गुजरात के दीव के भावसारवाडा क्षेत्र के निवासी थे। वे एक मछली व्यवसायी परिवार से ताल्लुक रखते थे। बेहतर रोजगार की तलाश में कुछ वर्ष पहले वे मुंबई आए और कांदिवली क्षेत्र में रहने लगे।
जानकारी के मुताबिक, मात्र एक महीने पहले उनकी मां का निधन हुआ था। अंतिम संस्कार में शामिल होने के बाद वे दोबारा ड्यूटी पर लौटे थे। परिवार को उम्मीद थी कि अब हालात धीरे-धीरे सामान्य होंगे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। ड्यूटी पर लौटने के कुछ ही दिनों बाद यह दुखद हादसा हो गया।
दीक्षित की आकस्मिक मृत्यु से उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। स्थानीय स्तर पर भी शोक की लहर है।
मस्कट स्थित भारतीय दूतावास ने दीक्षित सोलंकी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है और परिवार को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है। दूतावास संबंधित प्राधिकारियों के साथ समन्वय कर पार्थिव शरीर को भारत लाने की प्रक्रिया में जुटा है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और मध्य पूर्व में कार्यरत भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान तट वैश्विक तेल परिवहन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। यहां किसी भी प्रकार का सैन्य या अर्धसैन्य टकराव अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा प्रभाव डाल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे, तो समुद्री बीमा दरों, जहाज परिचालन लागत और वैश्विक बाजारों पर भी असर देखने को मिल सकता है।
Iran–Israel युद्ध की आग अब सीमाओं से परे आम लोगों तक पहुंच रही है। कांदिवली के युवा दीक्षित सोलंकी की मौत इस बात का दर्दनाक उदाहरण है कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों का खामियाजा निर्दोष नागरिकों को भी भुगतना पड़ता है।
भारत सरकार और संबंधित एजेंसियों के लिए अब चुनौती यह है कि वे संकटग्रस्त क्षेत्रों में कार्यरत भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और प्रभावित परिवारों को शीघ्र राहत प्रदान करें।
इस त्रासदी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि वैश्विक संघर्षों में फंसते आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय कितनी तत्परता दिखाता है।








