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महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने विधानसभा में “महाराष्ट्र धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026” पेश किया है। इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य राज्य में जबरदस्ती, धोखाधड़ी, प्रलोभन या विवाह के माध्यम से कराए जाने वाले धर्म परिवर्तन को रोकना बताया गया है।
सरकार के अनुसार यह विधेयक नागरिकों के धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा करने के साथ-साथ अवैध और जबरन धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए लाया गया है।
7 साल तक की सजा का प्रावधान
प्रस्तावित कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति दबाव, धोखे, लालच, जबरदस्ती या शादी के बहाने किसी का धर्म परिवर्तन कराता है, तो उसे अधिकतम 7 साल तक की जेल और आर्थिक दंड का सामना करना पड़ सकता है।
इसके अलावा सामूहिक या बार-बार किए गए अवैध धर्मांतरण के मामलों में और भी कड़ी सजा का प्रावधान रखा गया है। यह अपराध गंभीर और गैर-जमानती श्रेणी में रखा जा सकता है।
60 दिन पहले देनी होगी सूचना
विधेयक के अनुसार यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे निर्धारित अधिकारी को कम से कम 60 दिन पहले सूचना देनी होगी। इसके बाद प्रशासन जांच करेगा कि धर्म परिवर्तन किसी दबाव या लालच के कारण तो नहीं किया जा रहा है।
धर्म परिवर्तन होने के बाद भी संबंधित व्यक्ति को एक निश्चित समय सीमा के भीतर घोषणा और दस्तावेज जमा करने होंगे।
परिवार के सदस्य भी कर सकेंगे शिकायत
इस विधेयक में यह भी प्रावधान रखा गया है कि यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि उसके परिवार के सदस्य का धर्म परिवर्तन जबरदस्ती या धोखे से कराया गया है, तो वह पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकता है। शिकायत मिलने पर पुलिस को जांच करना अनिवार्य होगा।
बच्चों के धर्म को लेकर विशेष प्रावधान
बिल में एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह भी बताया गया है कि यदि किसी विवाह में धर्म परिवर्तन को अवैध माना जाता है, तो ऐसे विवाह से जन्मे बच्चे को मां के मूल धर्म का माना जाएगा।
सरकार का तर्क और विपक्ष की प्रतिक्रिया
सरकार का कहना है कि यह कानून जबरन धर्मांतरण और कथित “लव जिहाद” जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए जरूरी है। वहीं विपक्ष और कुछ सामाजिक संगठनों ने इस विधेयक पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इससे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निजी अधिकारों पर असर पड़ सकता है।
आगे क्या होगा
अभी यह विधेयक विधानसभा में पेश किया गया है। दोनों सदनों में चर्चा और पारित होने के बाद इसे राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद यह कानून पूरे महाराष्ट्र में लागू हो सकता है।








