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लोकसभा में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर चिंता जताते हुए कहा कि वहां की स्थिति बेहद गंभीर और चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि इस युद्ध का असर केवल उस क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और आम लोगों के जीवन पर पड़ रहा है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले कुछ हफ्तों से पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है, जिससे आर्थिक और मानवीय संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की बड़ी ऊर्जा जरूरतें—जैसे कच्चा तेल और गैस—इसी इलाके से पूरी होती हैं।
इस दौरान उन्होंने बताया कि विदेश मंत्री S. Jaishankar और केंद्रीय मंत्री Hardeep Singh Puri लगातार संसद को इस स्थिति की जानकारी दे रहे हैं और सरकार हर पहलू पर नजर बनाए हुए है।
पीएम मोदी ने कहा कि इस संघर्ष का असर वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता पर पड़ रहा है। ऐसे में सभी संबंधित देशों को बातचीत के जरिए इस संकट का समाधान निकालना चाहिए।
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार की पहली प्राथमिकता विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा है। उन्होंने बताया कि खाड़ी देशों में करीब 1 करोड़ भारतीय रहते हैं और बड़ी संख्या में भारतीय समुद्री व्यापार और जहाजरानी क्षेत्र में काम करते हैं।
उन्होंने जानकारी दी कि अब तक करीब 3 लाख 75 हजार भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है। इसके अलावा ईरान से लगभग 1000 भारतीयों को निकाला गया है, जिनमें 700 से ज्यादा मेडिकल छात्र शामिल हैं। सरकार ने 24 घंटे इमरजेंसी हेल्पलाइन शुरू की है और हर नागरिक तक मदद पहुंचाने के लिए पूरी तरह सतर्क है।
ऊर्जा आपूर्ति पर असर की बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। यह मार्ग भारत के लिए बहुत अहम है क्योंकि इसी रास्ते से तेल, गैस और उर्वरक देश में आते हैं। सरकार इस स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और जहाजों की आवाजाही सुचारु रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत अपने मित्र देशों के साथ लगातार संपर्क में है और कूटनीतिक स्तर पर स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार ने एक विशेष समूह बनाया है, जो रोजाना बैठक कर हालात की समीक्षा करता है और जरूरी कदम उठाता है।
कृषि और आम जनता पर पड़ने वाले असर को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि सरकार ने पहले से ही खाद्यान्न भंडारण और उर्वरकों की व्यवस्था कर रखी है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में देश को परेशानी न हो और किसानों पर कोई अतिरिक्त बोझ न पड़े।
इसके साथ ही उन्होंने देशवासियों से सतर्क रहने की अपील की। पीएम मोदी ने कहा कि इस तरह के संकट के समय अफवाहें और फर्जी खबरें तेजी से फैलती हैं, इसलिए लोगों को केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस बयान से साफ है कि भारत सरकार पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर गंभीर है और हर स्तर पर तैयारी कर रही है। भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता को बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता बनी हुई है।








