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जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर Mahavira की जयंती हर वर्ष बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाती है। महावीर जयंती जैन समुदाय का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व माना जाता है। वर्ष 2026 में महावीर जयंती चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाई जाएगी, जो आमतौर पर मार्च या अप्रैल के महीने में पड़ती है।
यह दिन भगवान महावीर के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है और इसे अहिंसा, सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा के रूप में देखा जाता है।
भगवान महावीर का जन्म लगभग 599 ईसा पूर्व वैशाली (वर्तमान बिहार) के कुंडलपुर में हुआ था। उनके पिता राजा सिद्धार्थ और माता त्रिशला थीं। जन्म के समय उनका नाम वर्धमान रखा गया था।
राजसी जीवन में पले-बढ़े महावीर ने 30 वर्ष की आयु में सांसारिक जीवन त्याग कर संन्यास ग्रहण कर लिया। इसके बाद उन्होंने कठोर तप और साधना के माध्यम से 12 वर्षों तक आत्मज्ञान की खोज की। अंततः उन्हें केवलज्ञान (सर्वोच्च ज्ञान) की प्राप्ति हुई और वे ‘महावीर’ कहलाए।
भगवान महावीर ने मानव जीवन के लिए अत्यंत सरल और प्रभावशाली सिद्धांत दिए, जिनका पालन आज भी लाखों लोग करते हैं। उनकी प्रमुख शिक्षाएं इस प्रकार हैं:
- अहिंसा (Non-violence): किसी भी जीव को मन, वचन और कर्म से कष्ट न पहुंचाना।
- सत्य (Truth): हमेशा सत्य बोलना और सत्य का पालन करना।
- अस्तेय (Non-stealing): चोरी या किसी का अधिकार छीनना गलत है।
- ब्रह्मचर्य (Celibacy): इंद्रियों पर नियंत्रण रखना।
- अपरिग्रह (Non-possession): आवश्यकता से अधिक वस्तुओं का संग्रह न करना।
इन पांच सिद्धांतों को जैन धर्म में ‘पंच महाव्रत’ कहा जाता है।
महावीर जयंती केवल एक जन्मोत्सव नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक संदेश का दिन है। यह पर्व लोगों को सादगी, संयम और शांति का जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
इस दिन जैन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक और प्रवचन आयोजित किए जाते हैं। भगवान महावीर की प्रतिमा को सजाकर शोभायात्राएं निकाली जाती हैं। भक्तजन दान-पुण्य, गरीबों की मदद और जीवों के प्रति करुणा दिखाने का संकल्प लेते हैं।
महावीर जयंती के अवसर पर देशभर में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं:
- मंदिरों में विशेष पूजा और अभिषेक
- भगवान महावीर की शोभायात्रा
- धार्मिक प्रवचन और सत्संग
- गरीबों को भोजन और वस्त्र दान
- पशु-पक्षियों के प्रति दया और सेवा
यह पर्व समाज में शांति, सहिष्णुता और भाईचारे का संदेश देता है।
आज के आधुनिक और तनावपूर्ण जीवन में भगवान महावीर की शिक्षाएं पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गई हैं। हिंसा, लालच और असहिष्णुता के बढ़ते माहौल में अहिंसा और अपरिग्रह का संदेश मानवता के लिए मार्गदर्शक बन सकता है।
महावीर जयंती हमें यह सिखाती है कि सच्ची खुशी भौतिक सुखों में नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और संतोष में है।
महावीर जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानवता के लिए एक प्रेरणादायक संदेश है। Mahavira की शिक्षाएं आज भी हमें सही मार्ग दिखाती हैं और एक शांतिपूर्ण, संतुलित और नैतिक जीवन जीने की प्रेरणा देती हैं।
इस पावन अवसर पर हमें उनके बताए सिद्धांतों को अपनाकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प लेना चाहिए।








