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झारखंड के हजारीबाग जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। अंधविश्वास और झूठे धार्मिक कर्मकांड के नाम पर एक मां ने अपनी ही मासूम बेटी की बेरहमी से हत्या कर दी। इस घटना ने न सिर्फ इंसानियत को शर्मसार किया है, बल्कि समाज में फैले अंधविश्वास की भयावह तस्वीर भी सामने ला दी है।
पुलिस के अनुसार, यह घटना हजारीबाग के एक ग्रामीण इलाके में हुई, जहां एक महिला ने अपने बीमार बेटे को ठीक करने के लिए तांत्रिक के कहने पर अपनी बेटी की बलि देने का खौफनाक कदम उठाया। बताया जा रहा है कि महिला का बेटा लंबे समय से बीमार था और इलाज के बावजूद उसकी हालत में सुधार नहीं हो रहा था। ऐसे में परिवार किसी तांत्रिक के संपर्क में आया, जिसने कथित तौर पर यह सुझाव दिया कि अगर किसी करीबी का खून चढ़ाया जाए या बलि दी जाए, तो बच्चा ठीक हो सकता है।
इसी अंधविश्वास के चलते मां ने अपनी मासूम बेटी को निशाना बना लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, महिला ने पहले बेटी को बहाने से अपने पास बुलाया और फिर किसी भारी वस्तु से उसके सिर पर वार कर दिया। बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई। इस वारदात की क्रूरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आरोपी मां ने यह सब अपने बेटे को बचाने की उम्मीद में किया।
घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। पड़ोसियों को जब इस वारदात की भनक लगी, तो उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने बच्ची का शव बरामद कर लिया और आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और तांत्रिक की भी तलाश की जा रही है, जिसने कथित तौर पर इस जघन्य अपराध के लिए महिला को उकसाया।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह परिवार पहले से ही आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर स्थिति में था। बेटे की बीमारी ने उन्हें मानसिक रूप से भी काफी परेशान कर दिया था, जिसका फायदा उठाकर तांत्रिक ने उन्हें अपने जाल में फंसा लिया। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आज के आधुनिक युग में भी लोग अंधविश्वास के चक्कर में ऐसे भयावह कदम कैसे उठा लेते हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि हत्या पूरी तरह से योजनाबद्ध थी। महिला ने पहले से ही यह तय कर लिया था कि वह अपनी बेटी की बलि देगी। हालांकि, पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस अपराध में और कौन-कौन शामिल था और क्या परिवार के अन्य सदस्य इस साजिश से वाकिफ थे या नहीं।
इस घटना ने राज्य सरकार और प्रशासन को भी सतर्क कर दिया है। अधिकारियों ने कहा है कि अंधविश्वास और तांत्रिक गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाने की भी बात कही गई है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
बाल अधिकार कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि समाज की सोच और व्यवस्था की विफलता का परिणाम है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि अंधविश्वास फैलाने वाले तांत्रिकों और ढोंगी बाबाओं के खिलाफ कड़े कानून बनाए जाएं और उन्हें सख्ती से लागू किया जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा और जागरूकता की कमी के कारण ग्रामीण इलाकों में आज भी अंधविश्वास गहराई से जड़ें जमाए हुए हैं। जब तक लोगों को वैज्ञानिक सोच और सही जानकारी नहीं दी जाएगी, तब तक इस तरह की घटनाएं होती रहेंगी। इस मामले में भी अगर समय रहते परिवार को सही सलाह और इलाज मिलता, तो शायद एक मासूम की जान बचाई जा सकती थी।
इस दर्दनाक घटना ने पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर कब तक अंधविश्वास के नाम पर ऐसी निर्दोष जिंदगियां बलि चढ़ती रहेंगी। जरूरत है कि समाज मिलकर ऐसे कुप्रथाओं के खिलाफ आवाज उठाए और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा दे।
फिलहाल, पुलिस ने आरोपी मां को हिरासत में लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। बच्ची के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। साथ ही, तांत्रिक की गिरफ्तारी के लिए भी लगातार छापेमारी की जा रही है।
यह घटना एक चेतावनी है कि अंधविश्वास और अज्ञानता कितनी खतरनाक हो सकती है। समाज को जागरूक होकर ऐसे मामलों के खिलाफ सख्ती से खड़ा होना होगा, ताकि भविष्य में कोई और मासूम इस तरह की बलि का शिकार न बने।








