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रणजीत कुमार | जहानाबाद, बिहार | समाचार वाणी न्यूज़
जिले में सैरातों की बंदोबस्ती को लेकर दो निकायों—जिला परिषद और नगर पंचायत घोसी—के बीच विवाद गहराता जा रहा है। नियमों को नजरअंदाज करते हुए नगर पंचायत द्वारा जिला परिषद की जमीन पर बंदोबस्ती किए जाने का मामला सामने आया है।
जानकारी के अनुसार, घोसी नगर पंचायत ने जिला परिषद की सैरात भूमि पर निविदा जारी कर बंदोबस्ती कर दी, जबकि उसी सैरात के लिए जिला परिषद पहले से ही प्रक्रिया में थी और उसने भी निविदा जारी कर रखी थी। इस असामान्य स्थिति के सामने आने के बाद जिला परिषद की कार्यपालक पदाधिकारी सह डीडीसी डॉ. प्रीति ने सख्त रुख अपनाया।
डीडीसी ने नगर पंचायत घोसी द्वारा की गई बंदोबस्ती को तत्काल प्रभाव से रद्द करते हुए संबंधित कार्यपालक पदाधिकारी से 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिला परिषद की खतियानी भूमि पर सैरात की बंदोबस्ती का अधिकार केवल जिला परिषद को ही प्राप्त है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पंचायतीराज अधिनियम और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के निर्देशों के तहत जिन जमीनों पर जिला परिषद का स्वामित्व दर्ज है, वहां सैरात की बंदोबस्ती भी जिला परिषद के अधिकार क्षेत्र में आती है।
इसके अलावा नगर विकास एवं आवास विभाग के निर्देशों में भी स्पष्ट किया गया है कि बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 की धारा 100 के अनुसार जिला परिषद की परिसंपत्तियां नगर निकायों में निहित नहीं होती हैं। ऐसे में नगर पंचायत द्वारा इस तरह की कार्रवाई नियमों के विपरीत मानी गई है।
डीडीसी डॉ. प्रीति ने इस पूरे मामले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि बिना अधिकार के की गई बंदोबस्ती पूरी तरह अनुचित है और इस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले की जांच जारी है और प्रशासन आगे की कार्रवाई में जुटा हुआ है।








