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राजेश चौधरी |बीकानेर | समाचार वाणी न्यूज़
राजस्थान में निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए शिक्षा विभाग ने सख्त कदम उठाए हैं। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही यूनिफॉर्म, किताबों, जूतों और अन्य सामग्री के नाम पर अभिभावकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ को देखते हुए सरकार ने कड़ी निगरानी के निर्देश जारी किए हैं। 📚
माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट (आईएएस) द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी निजी स्कूल को अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से सामान खरीदने के लिए मजबूर करने की अनुमति नहीं होगी। ऐसा करने पर संबंधित स्कूल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
तीन सदस्यीय कमेटियां करेंगी निरीक्षण
शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (CBEO) की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटियों का गठन करें। ये कमेटियां 15 अप्रैल 2026 तक जिले के सभी निजी विद्यालयों का औचक निरीक्षण करेंगी। 🔍
निरीक्षण के प्रमुख बिंदु
निरीक्षण के दौरान यह जांच की जाएगी कि—
- क्या स्कूल किसी तय दुकान से यूनिफॉर्म या किताबें खरीदने के लिए बाध्य कर रहा है
- क्या फीस नियमन अधिनियम का उल्लंघन किया जा रहा है
- क्या अभिभावकों से अनावश्यक या अधिक शुल्क वसूला जा रहा है
सभी कमेटियों को अपनी रिपोर्ट 20 अप्रैल 2026 तक निदेशालय को भेजनी होगी।
क्यों उठाया गया यह कदम?
विभाग के संज्ञान में आया था कि बार-बार निर्देश देने के बावजूद कई निजी स्कूल अभिभावकों पर महंगे ब्रांड और तय दुकानों से सामान खरीदने का दबाव बना रहे हैं। इसी को देखते हुए यह सख्ती की गई है। ⚠️
अभिभावकों को मिलेगी राहत
सरकार के इस फैसले से हजारों अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है। शिक्षा विभाग ने शिकायत दर्ज कराने के लिए ईमेल आईडी (ad.psp.dsc@rajasthan.gov.in) भी जारी की है।
निदेशक सीताराम जाट ने स्पष्ट कहा कि नियमों का उल्लंघन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।








