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दिल्ली की राजनीति और कानूनी गलियारों में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal ने एक्साइज पॉलिसी केस में बड़ा कदम उठाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में जज के खिलाफ रिक्यूजल (मामले से अलग होने) की याचिका दायर की है। खास बात यह है कि केजरीवाल ने इस मामले में खुद कोर्ट में अपनी पैरवी करने का फैसला भी किया है।
यह मामला उस समय और चर्चा में आ गया जब दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले 16 मार्च को केजरीवाल और अन्य आरोपियों को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की अपील पर जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दिया था। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को तय की थी।
दरअसल, CBI ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें Arvind Kejriwal समेत 22 अन्य आरोपियों को एक्साइज पॉलिसी केस में बरी कर दिया गया था। ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि CBI के पास ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है जिससे प्रथम दृष्टया भी आरोप साबित हो सकें।
अब इसी मामले में केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के सामने रिक्यूजल याचिका दाखिल की है। याचिका में उन्होंने यह आशंका जताई है कि उन्हें निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिल सकती। इससे पहले भी केजरीवाल और अन्य आरोपियों ने इस केस को दूसरी बेंच में ट्रांसफर करने की मांग की थी, जिसे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने खारिज कर दिया था।
AAP के बयान के अनुसार, केजरीवाल सोमवार को खुद कोर्ट में अपनी बात रखेंगे और केस की पैरवी करेंगे। यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि आमतौर पर ऐसे मामलों में वरिष्ठ वकील पैरवी करते हैं, लेकिन केजरीवाल ने खुद सामने आने का निर्णय लिया है।
इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि केजरीवाल का यह कदम न्यायपालिका के प्रति सम्मान की कमी को दर्शाता है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब ट्रांसफर याचिका खारिज हो गई, तो अब जज से ही खुद को अलग करने की मांग करना क्या न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान है?
इस मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने एक विस्तृत आदेश में केजरीवाल, Manish Sisodia और अन्य आरोपियों को राहत देते हुए कहा था कि जांच एजेंसी के पास पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। कोर्ट ने यहां तक कहा था कि जांच अधिकारी ने बिना ठोस आधार के आरोप तय किए, जो उसके अधिकारों का दुरुपयोग माना जा सकता है।
इसके बाद CBI ने हाईकोर्ट में अपील दायर की, जिसमें कहा गया कि ट्रायल कोर्ट का फैसला “गलत” और “सबूतों की अनदेखी” पर आधारित है। एजेंसी ने दावा किया कि उसने कई दस्तावेज, गवाहों के बयान, ईमेल और व्हाट्सएप चैट्स जैसे साक्ष्य जुटाए हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट की जज ने 9 मार्च की सुनवाई में CBI की अपील पर नोटिस जारी करते हुए ट्रायल कोर्ट के आदेश को “प्रथम दृष्टया त्रुटिपूर्ण” बताया था और उस पर अस्थायी रोक भी लगा दी थी। साथ ही, मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े ED के मामले की सुनवाई को भी फिलहाल टालने के निर्देश दिए गए थे।
अब केजरीवाल की रिक्यूजल याचिका और खुद पैरवी करने के फैसले ने इस केस को और संवेदनशील बना दिया है। राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से यह मामला काफी अहम हो गया है, क्योंकि इसका असर आने वाले समय में दिल्ली और राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल सभी की नजरें 6 अप्रैल की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि अदालत इस रिक्यूजल याचिका पर क्या रुख अपनाती है और केस किस दिशा में आगे बढ़ता है।








