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असम की राजनीति में इन दिनों एक बड़ा विवाद सामने आया है, जिसमें मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और कांग्रेस नेता पवन खेड़ा आमने-सामने आ गए हैं। पवन खेड़ा द्वारा लगाए गए आरोपों के जवाब में मुख्यमंत्री सरमा ने तीखा पलटवार करते हुए इन दावों को पूरी तरह फर्जी और भ्रामक करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये दस्तावेज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और विदेशी सोशल मीडिया स्रोतों की मदद से तैयार किए गए हैं।
दरअसल, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री की पत्नी को लेकर तीन पासपोर्ट होने का आरोप लगाया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि इन आरोपों का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है और यह पूरी तरह से मनगढ़ंत कहानी है। उन्होंने दावा किया कि जिन दस्तावेजों का हवाला दिया गया है, वे असली नहीं बल्कि फोटोशॉप और AI तकनीक के जरिए तैयार किए गए हैं।
मुख्यमंत्री सरमा ने आगे कहा कि उनकी जांच में यह सामने आया है कि इन दस्तावेजों की सामग्री एक पाकिस्तानी सोशल मीडिया ग्रुप से प्राप्त की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में विदेशी हस्तक्षेप की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता और यह चुनावी माहौल को प्रभावित करने की एक सुनियोजित साजिश हो सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि हाल के दिनों में पाकिस्तान के कई मीडिया चैनलों ने असम चुनावों को लेकर असामान्य रूप से अधिक कवरेज किया है। सरमा के अनुसार, पिछले 10 दिनों में पाकिस्तान में असम चुनावों पर कई टॉक शो किए गए, जिनमें कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की गई। उन्होंने इसे बेहद गंभीर मामला बताते हुए कहा कि इस दिशा में जांच एजेंसियों को ध्यान देना चाहिए।
हिमंत बिस्वा सरमा ने कानूनी कार्रवाई की चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आरोप लगाता है, तो उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की गंभीर धाराएं लागू हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में धोखाधड़ी और जालसाजी से संबंधित धाराएं लग सकती हैं, जिनमें कड़ी सजा का प्रावधान है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यदि चुनाव को प्रभावित करने के उद्देश्य से इस तरह के फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जाता है, तो यह और भी गंभीर अपराध बन जाता है, जिसमें उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। उन्होंने जानकारी दी कि इस मामले में उनकी पत्नी ने पहले ही FIR दर्ज करवा दी है और पुलिस से उचित कार्रवाई की उम्मीद जताई है।
इसके अलावा, सरमा ने यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति के लिए बहुत कम लागत में फर्जी कंपनियां और दस्तावेज तैयार करना आजकल आसान हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद एक नई कंपनी भी बनाई गई, जिसका इस्तेमाल इस पूरे विवाद को हवा देने के लिए किया गया।
इस पूरे मामले ने असम की राजनीति में हलचल मचा दी है। एक ओर जहां कांग्रेस अपने आरोपों पर कायम है, वहीं भाजपा और मुख्यमंत्री सरमा इसे साजिश करार दे रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह के विवादों का सामने आना राज्य की सियासत को और गरमा सकता है।
फिलहाल, मामला जांच के दायरे में है और आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस विवाद में क्या नए खुलासे सामने आते हैं। वहीं, इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि डिजिटल युग में फर्जी जानकारी और AI तकनीक का इस्तेमाल किस तरह से राजनीतिक हथियार के रूप में किया जा रहा है।








