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  • कुछ ‘उपरी’ नेताओं की सोच’: DMK सांसद कनिमोझी का Anurag Thakur के ‘हनुमान पहले अंतरिक्ष में यात्रा’ बयान पर तीखा हमला

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         हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और सांसद अनुराग ठाकुर द्वारा दिया गया एक बयान राजनीतिक हलकों में विवाद का विषय बन गया है। अनुराग ठाकुर ने एक कार्यक्रम में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि “हनुमान जी पहले अंतरिक्ष में गए थे”। उनके इस बयान के बाद DMK सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने तीखा पलटवार किया और इसे तथ्यों से परे, मिथकों को विज्ञान से जोड़ने का प्रयास बताया।

    अनुराग ठाकुर ने राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर छात्रों से बातचीत करते हुए सवाल किया कि अंतरिक्ष की यात्रा सबसे पहले किसने की थी? छात्रों ने उत्तर दिया — “नील आर्मस्ट्रांग।” इस पर ठाकुर ने कहा कि “मेरे हिसाब से सबसे पहले हनुमान जी अंतरिक्ष गए थे, जब वे संजीवनी बूटी लाने के लिए आकाशमार्ग से हिमालय तक पहुंचे।”

    यह बयान सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक तेजी से चर्चा में आ गया। समर्थकों ने इसे भारतीय संस्कृति और पौराणिक कथाओं को महत्व देने वाला बताया, वहीं आलोचकों का कहना है कि मिथकों को वैज्ञानिक तथ्यों के बराबर रखना गलत है और इससे नई पीढ़ी के सामने भ्रम की स्थिति पैदा होती है।

    इस बयान पर DMK सांसद कनिमोझी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “कुछ उत्तरी नेता ही इस तरह की बयानबाजी करते हैं। तमिलनाडु में इस तरह की राजनीति नहीं की जाती।” उन्होंने आगे कहा कि राजनीति में धार्मिक ग्रंथों और मिथकों का इस्तेमाल करना समाज के लिए खतरनाक है, खासकर तब जब वह शिक्षा और विज्ञान से जुड़े मुद्दों में हस्तक्षेप करने लगे।

    कनिमोझी ने जोर देकर कहा कि भारत की ताकत उसकी विविधता और वैज्ञानिक प्रगति है। अगर नेता बच्चों और युवाओं को मिथकों को विज्ञान के रूप में प्रस्तुत करेंगे, तो इससे देश के शैक्षिक माहौल पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

    यह विवाद सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विज्ञान और मिथक के बीच चल रही पुरानी बहस को भी उजागर करता है।

    1. वैज्ञानिक दृष्टिकोण:
      वैज्ञानिक इतिहास के अनुसार, अंतरिक्ष यात्रा का आरंभ 1961 में हुआ, जब सोवियत अंतरिक्ष यात्री यूरी गगारिन अंतरिक्ष में गए। वहीं, चंद्रमा पर पहला कदम नील आर्मस्ट्रांग ने 1969 में रखा।

    2. मिथकीय दृष्टिकोण:
      भारतीय धार्मिक ग्रंथों में हनुमान जी के बारे में कहा गया है कि वे आकाशमार्ग से लंबी दूरी तय कर सकते थे। कई समर्थकों का मानना है कि यह कथाएँ उस समय की उन्नत तकनीक का प्रतीक हैं, जिन्हें आधुनिक विज्ञान अब समझ पा रहा है।

    3. राजनीतिक परिप्रेक्ष्य:
      विरोधियों का आरोप है कि सत्ताधारी दल धार्मिक आस्था को वोट बैंक की राजनीति के लिए इस्तेमाल करता है, जबकि उसे शिक्षा, अनुसंधान और विज्ञान को बढ़ावा देना चाहिए।

    कनिमोझी का बयान इस बात को रेखांकित करता है कि दक्षिण भारतीय राजनीति में अक्सर विज्ञान और प्रगतिशील सोच को प्राथमिकता दी जाती है। DMK लंबे समय से तर्कसंगत विचारधारा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का समर्थन करती रही है। उन्होंने साफ कहा कि “तमिलनाडु में इस तरह की बातें राजनीति का हिस्सा नहीं बनतीं। यहां लोग तथ्यों और शिक्षा को प्राथमिकता देते हैं।”

    राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

    • सत्ताधारी खेमे का समर्थन: BJP के समर्थकों ने अनुराग ठाकुर के बयान को भारतीय संस्कृति का गौरव बताया। उनका कहना है कि धार्मिक कथाओं में गहरे वैज्ञानिक संकेत छिपे होते हैं।

    • विपक्ष का हमला: DMK, कांग्रेस और वामपंथी दलों ने इसे “बेमतलब की बयानबाजी” बताया और कहा कि सरकार को छात्रों को तथ्यात्मक शिक्षा देने पर ध्यान देना चाहिए।

    • जनता की राय: सोशल मीडिया पर लोगों की राय बंटी हुई दिखी। एक वर्ग ने इसे सांस्कृतिक गर्व से जोड़ा, वहीं कई लोगों ने इसे “अज्ञान फैलाने वाला बयान” कहा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि नेताओं के ऐसे बयान शिक्षा व्यवस्था पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं।

    • छात्रों में भ्रम: जब बच्चों को विज्ञान और मिथक में अंतर नहीं समझाया जाता, तो वे दोनों को एक समान मानने लगते हैं।

    • पाठ्यक्रम पर असर: राजनीतिक दबाव के चलते कभी-कभी मिथकीय संदर्भों को भी शिक्षा का हिस्सा बनाने की कोशिश होती है, जिससे शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित होती है।

    • समाज में विभाजन: धर्म और विज्ञान को एक ही तराजू पर तौलने से समाज में विभाजन और वैचारिक मतभेद बढ़ सकते हैं।

    अनुराग ठाकुर का “हनुमान पहले अंतरिक्ष यात्री थे” वाला बयान और उसपर कनिमोझी का हमला भारतीय राजनीति में एक बार फिर से विज्ञान बनाम मिथक की बहस को केंद्र में ले आया है। यह विवाद दिखाता है कि भारतीय राजनीति में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक गौरव और वैज्ञानिक तथ्यों को लेकर गहरी खींचतान जारी है।

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