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  • केचथेवु द्वीप की वापसी ही मछुआरों की समस्या का स्थायी समाधान, लेकिन केंद्र सरकार है गैर-सहयोगी: तमिलनाडु के सीएम एम.के. स्टालिन

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    तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने शुक्रवार (3 अक्टूबर 2025) को रमनाथपुरम में एक सार्वजनिक सभा में कहा कि केचथेवु द्वीप की वापसी से ही तमिलनाडु के मछुआरों की लंबे समय से चली आ रही गिरफ्तारी की समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है और राजनीति कर रही है।

    केचथेवु, एक छोटा सा द्वीप, जो तमिलनाडु के मछुआरों के लिए पारंपरिक मछली पकड़ने के क्षेत्र का हिस्सा है, 1974 में भारत सरकार ने श्रीलंका को सौंप दिया था। इसके बाद से मछुआरों को श्रीलंका की नौसेना द्वारा बार-बार गिरफ्तार किया जाना आम बात बन गई। इससे उनकी आजीविका बुरी तरह प्रभावित हुई है।

    मुख्यमंत्री स्टालिन ने इस विषय पर कहा, “केवल केचथेवु द्वीप की वापसी ही मछुआरों को राहत दिला सकती है। यह कोई छोटा मुद्दा नहीं, बल्कि तमिलनाडु के हजारों परिवारों की रोजी-रोटी का सवाल है।”

    एम.के. स्टालिन ने केंद्र सरकार, विशेष रूप से भाजपा नेतृत्व वाली सरकार पर इस मुद्दे पर गंभीरता न दिखाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्र केवल चुनावी फायदे के लिए इस मुद्दे का इस्तेमाल कर रही है, लेकिन असली कार्रवाई करने में हिचकिचा रही है।

    उन्होंने कहा, “जब मनिपुर हिंसा, गुजरात के मोर्बी पुल हादसे या महाराष्ट्र के कुम्भ मेले में मौतें होती हैं, तब भाजपा चुप रहती है, लेकिन जैसे ही चुनाव का समय आता है, वह केचथेवु जैसे मुद्दों पर राजनीति करने के लिए दौड़ पड़ती है।”

    2026 में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इस चुनाव को लेकर भाजपा ने राज्य में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री स्टालिन ने लोगों से सतर्क रहने और भाजपा की चालाकियों में न फंसने की अपील की। उन्होंने कहा कि मछुआरों का मुद्दा राजनीति का उपकरण नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका वास्तविक समाधान होना चाहिए।

    तमिलनाडु के मछुआरों की जिंदगी इस द्वीप विवाद की वजह से बेहद संकट में है। पारंपरिक मछली पकड़ने के इलाकों में श्रीलंका की नौसेना द्वारा अक्सर उनकी गिरफ्तारी की जाती है। इससे न केवल उनकी आमदनी प्रभावित होती है, बल्कि सामाजिक और मानसिक तनाव भी बढ़ता है।

    मछुआरों के लिए केचथेवु द्वीप की वापसी एक लंबित उम्मीद है, जो उन्हें सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता दे सकती है।

    मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि केंद्र सरकार को इस मामले में राजनीति छोड़कर एक संवेदनशील और निर्णायक कदम उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु सरकार भी लगातार केंद्र के साथ इस मुद्दे को उठाती रही है, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है।

    उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि केंद्र सरकार केचथेवु द्वीप वापसी के लिए श्रीलंका से वार्ता को तेज करे और मछुआरों की समस्या का स्थायी समाधान निकाले।”

    तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की यह मांग है कि केचथेवु द्वीप की वापसी ही मछुआरों की गिरफ्तारी की समस्या का स्थायी और प्रभावी समाधान है। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार की गैर-सहयोगी नीति की आलोचना की और राज्यवासियों से सतर्क रहने का आह्वान किया।

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