• Create News
  • ▶ Play Radio
  • आखिर जीत गई प्रतिका रावल! ICC के इनकार के बाद भी मिला मेडल, जानिए पूरा सच

    इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं।

    भारतीय महिला क्रिकेट टीम के हालिया विश्व खिताब के बाद एक नाम लगातार सुर्खियों में बना हुआ है — प्रतिका रावल। टीम इंडिया की इस युवा खिलाड़ी ने फाइनल मैच से पहले तक जबरदस्त प्रदर्शन किया था और स्मृति मंधाना के बाद सबसे ज्यादा रन बनाकर अपनी टीम की जीत की नींव रखी थी। लेकिन जब पुरस्कार वितरण का वक्त आया, तब एक विवाद खड़ा हो गया। ICC (अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद) ने प्रतिका रावल को मेडल देने से इनकार कर दिया था, जिससे सोशल मीडिया पर बवाल मच गया।

    कहा जा रहा था कि प्रतिका को चोट लगने के कारण फाइनल मैच में खेलने का मौका नहीं मिला था, और इसी वजह से उनके नाम पर मेडल जारी नहीं किया गया। लेकिन क्रिकेट प्रेमियों और पूर्व खिलाड़ियों ने इसे “अन्याय” करार दिया। सोशल मीडिया पर #JusticeForPritika ट्रेंड करने लगा, और भारतीय क्रिकेट फैंस ने प्रतिका को उनका हक दिलाने की मांग की।

    कई पूर्व महिला क्रिकेटरों और खेल पत्रकारों ने भी ICC के इस फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक खिलाड़ी जिसने टूर्नामेंट के शुरुआती मैचों में टीम को सेमीफाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई, उसे केवल अंतिम मैच न खेलने के कारण अनदेखा करना अनुचित है।

    भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) ने भी इस मामले में ICC से स्पष्टीकरण मांगा और आधिकारिक तौर पर कहा कि टीम के हर योगदानकर्ता को सम्मान मिलना चाहिए। इसी दबाव और विरोध के बीच आखिरकार ICC को अपना फैसला बदलना पड़ा। ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रतिका रावल को अब उनका वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडल मिल गया है।

    प्रतिका रावल को यह मेडल उनके घर पर विशेष समारोह के दौरान दिया गया। बीसीसीआई की महिला विंग की प्रमुख और पूर्व कप्तान मिताली राज ने स्वयं उन्हें मेडल पहनाकर सम्मानित किया। समारोह के दौरान मिताली राज ने कहा, “प्रतिका जैसी खिलाड़ी हमारे देश की असली ताकत हैं। उन्होंने साबित किया है कि टीम स्पिरिट केवल मैदान पर नहीं, हर परिस्थिति में दिखाई जाती है।”

    प्रतिका ने मेडल मिलने के बाद अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक भावुक पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा, “यह सिर्फ एक मेडल नहीं, बल्कि मेरे हर पसीने की बूंद का सम्मान है। मैं खुश हूं कि आखिरकार मेरी मेहनत को पहचाना गया।” उनकी इस पोस्ट पर स्मृति मंधाना, हरमनप्रीत कौर और शेफाली वर्मा ने भी बधाई दी।

    यह पूरा मामला इस बात की याद दिलाता है कि खेल में केवल अंतिम प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि पूरे टूर्नामेंट में किया गया योगदान भी महत्वपूर्ण होता है। प्रतिका की कहानी उन सैकड़ों खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन गई है जो टीम के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देते हैं, चाहे वे मैदान पर आखिरी गेंद तक मौजूद रहें या नहीं।

    खेल विशेषज्ञों का मानना है कि ICC की शुरुआती चूक ने संगठन की छवि को प्रभावित किया, लेकिन बाद में गलती सुधारने का निर्णय सही रहा। इससे यह संदेश गया कि किसी खिलाड़ी की मेहनत को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।

    भारत के लिए यह क्षण केवल प्रतिका रावल की व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि महिला क्रिकेट की बढ़ती ताकत और पहचान का प्रतीक भी है। भारतीय महिला टीम का विश्व विजेता बनना अपने आप में ऐतिहासिक है, और प्रतिका जैसी खिलाड़ियों ने इस उपलब्धि को संभव बनाया।

    अब जब प्रतिका रावल को उनका हक मिल चुका है, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि न्याय भले देर से मिला, लेकिन मिला जरूर। इस घटना ने यह भी साबित कर दिया कि सोशल मीडिया की आवाज़ और जनता का समर्थन खिलाड़ियों के लिए कितना बड़ा सहारा बन सकता है।

    प्रतिका की यह उपलब्धि और संघर्ष आने वाले समय में भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होगा — एक ऐसी कहानी, जो बताती है कि सच्ची मेहनत और ईमानदारी को कोई संगठन या नियम दबा नहीं सकता।

  • Related Posts

    स्पेस और ऊर्जा के माध्यम से जीवन में बदलाव लाने वाले विशेषज्ञ: Rahul Ramesh Parse ने Vastu Prabhaa के जरिए बनाई एक विशिष्ट पहचान

    इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं। आज के दौर में जहां लोग जीवन में संतुलन, समृद्धि, मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा की तलाश में रहते हैं,…

    Continue reading
    मुख्यमंत्री आवास पहुंची BJYM की साइकिल यात्रा: शंकर गोरा के नेतृत्व में युवाओं ने जताया आभार, CM भजनलाल शर्मा ने सुनी ‘मन की बात’

    इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं। राजेश चौधरी | जयपुर | समाचार वाणी न्यूज़ भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के प्रदेश अध्यक्ष शंकर गोरा के नेतृत्व…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *