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  • बिहार चुनाव 2025: पहले चरण में महिलाओं की रिकॉर्ड वोटिंग ने बढ़ाई सियासी गर्मी, नीतीश या तेजस्वी?

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    बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में महिलाओं की जबरदस्त भागीदारी ने राज्य की सियासी तस्वीर बदल दी है। 121 सीटों पर हुए मतदान में रिकॉर्ड तोड़ बंपर वोटिंग दर्ज की गई, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। विश्लेषकों का कहना है कि इस उच्च महिला मतदान से चुनावी समीकरण बदल सकते हैं और यह तय करना मुश्किल हो गया है कि इसका लाभ नीतीश कुमार की एनडीए सरकार को मिलेगा या तेजस्वी यादव के विपक्षी गठबंधन को।

    राज्य के कई जिलों में मतदान केंद्रों पर महिलाओं की लंबी कतारें देखी गईं। सुबह से ही महिलाएं अपने वोट डालने के लिए लाइन में खड़ी थीं। इस बढ़ी हुई महिला भागीदारी ने चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों दोनों को चौंका दिया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में महिला मतदाता अब चुनावी रणनीतियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं। पिछले चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि महिला मतदाता आम तौर पर सामाजिक योजनाओं, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशील रहते हैं।

    इस बार भी एनडीए और विपक्ष दोनों ही महिला मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए अपनी-अपनी योजनाओं को जोर-शोर से प्रचारित कर रहे हैं। नीतीश कुमार की सरकार ने महिलाओं के लिए विशेष वित्तीय योजनाएं और स्वास्थ्य, शिक्षा एवं रोजगार पर फोकस किया है। वहीं तेजस्वी यादव के गठबंधन ने भी महिला सशक्तिकरण, सुरक्षा और रोजगार को प्रमुख मुद्दा बनाया है।

    एनडीए के नेताओं का कहना है कि पहले चरण में भारी महिला मतदान उनके पक्ष में गया है। पार्टी का दावा है कि महिलाओं ने पहले चरण में अपने समर्थन से एनडीए को मजबूती दी है। इसके अलावा, बीजेपी और जेडीयू ने कई गांवों और शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के लिए विशेष प्रचार अभियान चलाया, जिसमें उनके हितों और योजनाओं को विस्तार से बताया गया।

    विपक्षी गठबंधन ने भी दावा किया कि महिलाओं ने विपक्ष के एजेंडे को मजबूती दी है। तेजस्वी यादव और उनकी टीम ने महिला मतदाताओं को विशेष कार्यक्रमों और घर-घर अभियान के माध्यम से जोड़ा, जिससे उनकी लोकप्रियता बढ़ी।

    राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि बिहार में महिलाओं की बढ़ी हुई भागीदारी किसी भी पार्टी के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। उन्होंने बताया कि महिलाएं अक्सर परिवार और समाज में प्रभावशाली होती हैं और उनका मतदान अन्य वोटरों के निर्णय को भी प्रभावित कर सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि पहले चरण में भारी महिला मतदान का परिणाम अगले चरण के चुनावी रुझानों को प्रभावित कर सकता है। अगर महिलाएं किसी विशेष दल के पक्ष में वोट करती हैं, तो यह पूरे राज्य में उसकी लहर पैदा कर सकता है।

    मतदान करने वाली महिलाओं ने कहा कि उन्होंने अपने अधिकार का प्रयोग किया और इसे लोकतंत्र की जीत माना। कई महिलाओं ने बताया कि सरकार की महिला कल्याण योजनाओं और रोजगार के अवसरों ने उन्हें वोटिंग के लिए प्रेरित किया।

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