मुरैना जिले में प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने सोमवार को एक विशेष अभियान चलाया। जिले के सभी पटवारी और पंचायत सचिव/जीआरएस के अनुपस्थित पाए जाने के मामले में कलेक्टर ने दोपहर 12 बजे वीडियो कॉलिंग के माध्यम से अचानक निरीक्षण किया। इस दौरान आठ पटवारियों को सस्पेंड कर दिया गया।
कलेक्टर ने पहले ही यह निर्देश जारी किया था कि पटवारी सोमवार और गुरुवार को सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक अनिवार्य रूप से पंचायत भवन में उपस्थित रहें और ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करें। पंचायत सचिव और ग्राम रोजगार सहायक (जीआरएस) को भी प्रतिदिन निर्धारित समय पर जनसुनवाई में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया था।
कलेक्टर कार्यालय से किए गए निरीक्षण में सभी तहसीलों और जनपद पंचायतों के अधिकारियों को लाइव लोकेशन साझा करने का आदेश दिया गया। दोपहर 12 बजे जब कलेक्टर ने वीडियो कॉल की, तो कई पटवारी अनुपस्थित पाए गए। कुछ पटवारी इस दौरान इतनी घबराई कि जवाब देते समय उनकी जबान लड़खड़ा गई, जबकि कुछ ने लोकेशन साझा नहीं की।
कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने कहा कि यह कार्रवाई प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने और जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए की गई है। उन्होंने बताया कि अनुपस्थित पाए गए पटवारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो।
इस निरीक्षण के दौरान कुल आठ पटवारी सस्पेंड किए गए। कलेक्टर ने कहा कि सस्पेंड किए गए पटवारियों के नाम और उनके कार्यक्षेत्र की जानकारी प्रशासनिक रिकॉर्ड में दर्ज कर ली गई है। आगे की कार्रवाई में, संबंधित पटवारियों के स्थानीय अधिकारियों और विभागीय अधिकारियों से स्पष्टीकरण लिया जाएगा।
कलेक्टर ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि जनता की समस्याओं का समय पर समाधान करना उनका कर्तव्य है। अनुपस्थित रहना और जिम्मेदारी से बचना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन के प्रति लापरवाही किसी भी स्तर पर सहन नहीं की जाएगी।
इस अभियान के तहत पटवारी, पंचायत सचिव और जीआरएस की व्यावहारिक उपस्थिति और कार्यकुशलता का मूल्यांकन किया गया। कलेक्टर ने कहा कि वीडियो कॉलिंग के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया कि अधिकारी अपनी ड्यूटी का सही पालन कर रहे हैं या नहीं।
मुरैना कलेक्टर ने आगे कहा कि प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने और लोगों को समय पर सेवाएं देने के लिए नियमित निरीक्षण और वीडियो कॉलिंग जैसी तकनीकी उपायों को अपनाया जाएगा। यह कदम ग्रामीण जनता को सरकार की नीतियों और सेवाओं का लाभ समय पर मिलने के लिए अहम साबित होगा।
ग्रामवासियों ने इस कार्रवाई को प्रशासन की तत्परता और जवाबदेही का संकेत बताया। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों की उपस्थिति और उनकी सक्रियता से जनसुनवाई और सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह के अभियान लगातार जारी रहेंगे।
कलेक्टर ने यह भी कहा कि प्रशासन किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जनता के प्रति अपने दायित्वों को गंभीरता से निभाएं और निर्धारित समय पर पंचायत भवन में उपस्थित रहें।








