मुंबई के प्रतिष्ठित St. Xavier’s College में जेसुइट एलुमनी एसोसिएशन की ओर से आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में छात्रों और पुरातन छात्रों ने प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा को एक नैतिक ज़िम्मेदारी के रूप में देखे जाने पर गहरी चर्चा की। शनिवार को आयोजित इस संवाद-क्रम में बॉम्बे आर्चबिशप जॉन रोड्रिगेज मुख्य अतिथि बने, जिन्होंने पर्यावरण को सिर्फ एक सहायक संसाधन न मानकर आने वाली पीढ़ियों को दी जाने वाली एक विरासत के रूप में प्रस्तुत किया।
आर्चबिशप रोड्रिगेज ने अपने संबोधन में कहा कि जैसे हम आर्थिक संपत्ति को अपनी संतानों को बड़े बेटे-पुलाद के रूप में छोड़ना चाहते हैं, वैसे ही हमें प्राकृतिक संसाधनों, पेड़ों और जल जैसे महत्वपूर्ण तत्वों को भी भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना चाहिए। उन्होंने पोप जॉन पॉल द्वितीय के उदहारण का जिक्र करते हुए बताया कि सीवनवां आदेश—”तू न चुरा”—न सिर्फ भौतिक वस्तुओं पर लागू होता है, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों के दुरुपयोग को लेकर भी यह आदेश हमें सचेत करता है।
इन व्याख्यानों का उद्देश्य सिर्फ पर्यावरणीय मुद्दों पर जानकारी देना नहीं था, बल्कि इसे एक सामूहिक नैतिक दायित्व की संकल्पना के रूप में स्थापित करना था। उपस्थित दर्शकों में विद्यार्थी, माजी विद्यार्थी और प्रोफेसर सभी पर्यावरण संरक्षण को सामाजिक न्याय के परिप्रेक्ष्य में देख रहे थे। वक्ताओं ने यह भी बताया कि प्रकृति की रक्षा केवल पर्यावरणविदों का काम नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी होनी चाहिए।
St. Xavier’s College की पर्यावरण नीति पहले से ही इस सोच को प्रतिबिंबित करती है। कॉलेज की पर्यावरण समिति (XEC) ने यह मिशन लिया है कि कैंपस की गतिविधियाँ पर्यावरण-अनुकूल हों और उन संसाधनों का संरक्षण हो, जो लंबे समय तक पर्यावरणीय स्वास्थ्य को बनाए रखने में योगदान दें। इस नीति दस्तावेज़ में साफ कहा गया है कि कचरा प्रबंधन, ऊर्जा उपयोग में दक्षता और छात्र-शिक्षक समुदाय में सस्टेनेबल व्यवहार को बढ़ावा देना संस्थान की प्राथमिकता है।
कार्यक्रम के दौरान यह भी चर्चा हुई कि स्थानीय और वैश्विक स्तर पर जल संकट, वेस्ट मैनेजमेंट और क्लाइमेट चेंज जैसे गंभीर मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है, और ऐसे समय में युवाओं की भूमिका निर्णायक हो सकती है। Xavier के öğrencियों को यह संदेश दिया गया कि वे न सिर्फ पर्यावरण संरक्षक बनें, बल्कि सक्रिय नागरिक भी बनें, जो हर दिन छोटे लेकिन असरदार कदम उठाएँ।
St. Xavier’s का यह कदम साहुकारिता के साथ सामाजिक चेतना को जोड़ने का एक शानदार उदाहरण है। कॉलेज ने यह संदेश दिया कि शिक्षा-संस्थान केवल शैक्षणिक ज्ञान प्रदान करने का मंच नहीं हैं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी, नैतिकता और भविष्य-निर्माण का जिम्मेदार केंद्र भी हो सकते हैं।
इस पहल से यह उम्मीद जगी है कि मुंबई के छात्रों और नागरिकों में पर्यावरणीय संरक्षण की भावना और बढ़ेगी। जब युवा इस तरह की नैतिक चर्चाओं का हिस्सा बनेंगे, तो यह न सिर्फ उनके व्यक्तित्व को आकार देगा, बल्कि पूरे शहर में स्थिरता और प्रकृति के प्रति सम्मान की कतार खड़ी करेगा।
आगे की राह पर, St. Xavier’s College और जेसुइट एलुमनी समुदाय का यह कदम यह दिखाता है कि पर्यावरण-संरक्षण सिर्फ वैज्ञानिक या तकनीकी मसला नहीं है, बल्कि यह नैतिकता, विरासत और समाज-निर्माण का मुद्दा है। इनमें से उठाए गए विचार आने वाले समय में कितनी गहराई तक स्कूल-कॉलेज स्तर पर व्यवहार में उतर पाते हैं, यह देखना बाकी है — लेकिन इतना साफ है कि St. Xavier’s ने इस संवाद की शुरुआत बेहद प्रभावशाली ढंग से की है।








