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  • खंडवा में फसल बीमा और प्याज मुआवज़े को लेकर किसानों का फूटा गुस्सा, 10,000 किसानों की रेल रोक आंदोलन की चेतावनी से प्रशासन में मची हलचल

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    खंडवा जिले में किसानों का आक्रोश आखिरकार आंदोलन में बदल गया। फसल बीमा भुगतान में लगातार देरी और प्याज फसल खराब होने के बावजूद मुआवज़ा न मिलने से परेशान किसानों ने शनिवार को बड़ा कदम उठाते हुए रेल रोक आंदोलन की चेतावनी दी। जिले के 70 से अधिक गांवों से आए करीब 10,000 किसानों ने एकजुट होकर स्पष्ट कर दिया कि अब वे केवल वादों से संतुष्ट नहीं होंगे और ठोस निर्णय लिए जाने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

    टिगरिया गांव के मांगलिक भवन में सर्व किसान समाज के बैनर तले किसानों की विशाल सभा आयोजित की गई। भीड़ का आकार देखकर यह साफ था कि किसानों का सब्र अब जवाब दे चुका है। मंच से किसानों ने कहा कि बीते कई महीनों से वे फसल बीमा राशि का इंतजार कर रहे हैं, जबकि बड़े पैमाने पर प्याज की खेती को हुए नुकसान ने आर्थिक संकट को और बढ़ा दिया है। किसानों ने बताया कि सरकार से बार-बार ज्ञापन सौंपने, अधिकारियों के साथ बैठकों और समझाइश के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे ग्रामीण अंचल में असंतोष बढ़ता गया।

    किसानों ने कहा कि प्याज की फसल खराब हो जाने से प्रति किसान 50,000 रुपये मुआवज़े की मांग लंबे समय से लंबित है। हालात यह हैं कि कई परिवारों को रोजमर्रा का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है। किसानों ने आरोप लगाया कि बीमा कंपनियों द्वारा फसल सर्वे में देरी की गई और कई पात्र किसानों के नाम सूची से बाहर कर दिए गए, जिसके कारण उन्हें बीमा राशि नहीं मिली। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार किसानों को राहत नहीं दे सकती, तो कम से कम यह स्पष्ट कर दे कि उन्हें बीमा और मुआवज़ा कब मिलेगा।

    सभा में किसानों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि सरकार पर दबाव बनाने के लिए रेल रोक आंदोलन शुरू किया जाएगा। जैसे ही यह सूचना जिला प्रशासन तक पहुंची, अधिकारियों में हड़कंप मच गया और तुरंत स्थानीय प्रशासन को हालात संभालने के निर्देश दिए गए। प्रशासन ने किसानों को समझाने की कोशिश की कि रेल रोकना कानून व्यवस्था के लिए चुनौती हो सकता है, लेकिन किसानों ने साफ कर दिया कि अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि वास्तविक सहायता चाहिए।

    किसानों ने कहा कि कृषि पर निर्भर परिवारों की हालत दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है। प्याज की फसल में लगे खर्च की वसूली भी नहीं हो पाई और ऊपर से फसल बीमा राशि का इंतजार आर्थिक संकट को और गहरा कर रहा है। आंदोलनकारी किसानों ने यह भी चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और उग्र हो सकता है।

    खंडवा का यह आंदोलन सिर्फ स्थानीय मुद्दा नहीं बल्कि उन हजारों किसानों की पीड़ा को दर्शाता है, जो फसल बीमा योजनाओं और मुआवज़ा नीतियों की धीमी प्रक्रियाओं के कारण मुश्किलों से जूझ रहे हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार और प्रशासन इस व्यापक किसान आंदोलन को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।

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