नाशिक जिले के मालेगांव में पुलिस ने नकली करंसी नज़दीकी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जब एक बड़ी कार्रवाई के अंतर्गत लगभग 5.4 लाख रुपये की नकली 500‑रुपये के नोटों के साथ दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। यह कदम स्थानीय पुलिस और गुन्हे शाखा टीम की गंभीरता और सक्रियता का प्रदर्शन है, जो नकली मुद्रा के प्रसार को रोकने की दिशा में लगातार काम कर रही है।
मालेगांव पुलिस की टीम ने छापेमारी करते समय धनराज धोते (20) और राहुल आम्बटकर (25) नामक दो संदिग्धों को हिरासत में लिया। ये दोनों मृत्य रूप में 500 के नकली नोटों की खेप के साथ पकड़े गए। आरोपियों के पास कुल 1,087 नकली नोट मिले, जो कि लगभग 5 लाख रुपये के मूल्य के थे, साथ ही उनके पास 13,500 रुपये असली करंसी भी पाई गई।
पुलिस के शुरुआती अन्वेषण से यह जानकारी भी सामने आई है कि ये नकली नोट किसी अंतर-राज्य गिरोह से जुड़े हो सकते हैं। आरोपियों द्वारा नकली करंसी छापने में उपयोग किए गए कागज़ और स्याही स्थानीय स्रोतों के बजाय चीन से आयात किए गए कच्चे माल का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस ने यह भी दावा किया है कि यह गिरोह मुख्य रूप से वृद्धों द्वारा चलाए जाने वाले रात के बाजारों को निशाना बनाता था, जहां नकली नोटों को चलाना आसान होता था क्योंकि वहाँ के विक्रेता अक्सर सटीक नोटों की पहचान नहीं कर पाते।
मालेगांव पुलिस अधीक्षक अनुराग जैन के निर्देशन में यह ऑपरेशन चलाया गया था और चार टीमों की सहायता से यह कार्रवाई की गई। आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के भी मुकदमे दर्ज किए गए हैं। पुलिस की दृष्टि में यह सिर्फ एक मामूली नकदी पकड़ नहीं, बल्कि एक बड़े नेटवर्क को निशाना बनाने की शुरुआत है।
जांच में यह भी सामने आया है कि नकली नोट वर्धा (महाराष्ट्र) में एक स्थान से प्रिंट हो रहे थे। पुलिस का अनुमान है कि छापखाना वहीं स्थित था, जहाँ से यह गिरोह नकली करंसी को बड़े स्तर पर बाजार में पहुंचाने की तैयारी कर रहा था।
जब्त नोटों की गिनती और जांच के बाद, दोनों आरोपियों को मालेगांव की अदालत में पेश किया गया और पुलिस हिरासत में дальней पूछताछ के लिए उन्हें दस दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
क्राइम विश्लेषकों का कहना है कि नकली करंसी के मामलों में गिरोह रोज़ाना नए तरीके अपना रहा है। डिजिटल लेनदेन और नकली मुद्रा नेटवर्क के संयोजन ने इस प्रकार के अपराधों को पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है। मालेगांव पुलिस की यह कार्रवाई सिर्फ एक चेतावनी है: ऐसी अवैध आर्थिक गतिविधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तेज हो रही है।
स्थानीय लोगों में इस खबर को लेकर राहत की भावना है। उन्होंने पुलिस की सक्रियता को स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इस गिरोह की जड़ें पूरी तरह उखाड़ी जाएँगी। पुलिस अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि यदि किसी को संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी हो तो वे तुरंत सूचना दें, ताकि आगे के नेटवर्क को भी बेनकाब किया जा सके।
मालेगांव पुलिस की यह बड़ी सफलता न केवल नकली मुद्रा की कार्रवाई में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह यह संकेत भी देती है कि नाथ‑राजस्व अपराधों को रोकने में स्थानीय एजेंसियाँ अपनी भूमिका गंभीरता से ले रही हैं। आने वाले समय में इस मामले की गहराई से जांच की जाएगी और अन्य शामिल सदस्यों तक भी पहुंचने का प्रयास किया जाएगा।








