इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं।

राजेश चौधरी | फरीदाबाद | समाचार वाणी न्यूज़
फरीदाबाद, हरियाणा में आयोजित 32वीं उत्तर क्षेत्रीय परिषद (Northern Zonal Council) की बैठक शनिवार को कई ऐतिहासिक निर्णयों की साक्षी बनी। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने की, जबकि सह-अध्यक्ष के रूप में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोज सिन्हा व अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भाग लिया। इस महत्वपूर्ण बैठक में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सक्रिय और प्रमुख भागीदारी ने ध्यान आकर्षित किया।
यह बैठक सिर्फ एक औपचारिक मंच नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत @ 2047 विजन की दिशा में आगे बढ़ने के लिए सामूहिक नीति-निर्माण का अनुकरणीय उदाहरण रही।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बैठक में कहा कि भारत की प्रगति तभी संभव है जब राज्य आपसी सहयोग और समन्वय की भावना को मजबूत करें।
उन्होंने जोर देकर कहा—
“Whole-of-Government Approach के तहत प्रदेशों के बीच तालमेल राष्ट्रीय विकास के लिए अनिवार्य है। राज्य जितने मज़बूत होंगे, देश उतना विकसित होगा।”
अमित शाह ने राज्यों को कानून-व्यवस्था, सीमा सुरक्षा, नशीले पदार्थों की रोकथाम, साइबर अपराध और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास जैसे विषयों पर संयुक्त रूप से कार्य करने की आवश्यकता बताई।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बैठक में न केवल प्रदेश की स्थिति रखी, बल्कि कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि—
“राजस्थान अपनी विकास यात्रा को और गति देने के लिए सभी पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय को मजबूत कर रहा है। अंतरराज्यीय सहयोग ही हमारी सामूहिक प्रगति का मार्ग प्रशस्त करेगा।”
मुख्यमंत्री ने बैठक में अनेक विषयों पर प्रस्तुतिकरण दिया, जिनमें शामिल रहे—
✔ सीमा सुरक्षा व पुलिस समन्वय
राजस्थान-पंजाब, राजस्थान-हरियाणा और राजस्थान-गुजरात सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था को और मज़बूत करने का प्रस्ताव रखा गया।
✔ औद्योगिक गलियारा और सड़क कनेक्टिविटी
मुख्यमंत्री ने केंद्र से आग्रह किया कि राजस्थान को औद्योगिक गलियारे, लॉजिस्टिक हब और हाईवे नेटवर्क में अधिक प्राथमिकता दी जाए।
✔ जल प्रबंधन एवं संसाधन साझा करना
राजस्थान ने अन्य राज्यों के साथ जल-साझेदारी, कैचमेंट एरिया डेवलपमेंट और सूखा-प्रबंधन पर संयुक्त नीति का सुझाव दिया।
✔ नशीले पदार्थों पर कड़ा एक्शन
सीएम शर्मा ने ड्रग नेटवर्क को तोड़ने के लिए उत्तर भारत के राज्यों के बीच एकीकृत टास्क फोर्स बनाने का सुझाव दिया।
सभा में कुल 34 से अधिक मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। इनमें प्रमुख विषय रहे—
• कानून-व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा
राज्यों ने सीमा-क्षेत्रों में संयुक्त पुलिस अभियान के लिए साझा रणनीति पर चर्चा की।
• साइबर क्राइम रोकथाम
फर्जी कॉल सेंटर, डिजिटल धोखाधड़ी और साइबर अपराध नेटवर्क की रोकथाम पर सहमति बनी।
• बिजली, जल, परिवहन के संयुक्त प्रोजेक्ट
राज्यों ने साझा जल-संसाधन, ट्रांसमिशन लाइन और इंटर-स्टेट हाईवे प्रोजेक्ट्स को गति देने पर जोर दिया।
• औद्योगिक निवेश और रोजगार
प्रदेशों के बीच व्यापारिक बाधाओं को कम करने और MSME विकास को बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया।
अमित शाह ने सभी राज्यों से कहा कि—
“विकसित भारत के लक्ष्य को समय पर हासिल करना है तो यह परिषद सिर्फ चर्चा का मंच नहीं, बल्कि क्रियान्वयन का माध्यम होना चाहिए।”
बैठक में राजस्थान ने अपनी प्राथमिकताएँ स्पष्ट रूप से रखीं:
● माइनिंग सेक्टर का विस्तार
राज्य ने खनिज-आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने हेतु केंद्र से नई खनन नीति में सहयोग मांगा।
● डेज़र्ट एरिया डेवलपमेंट
थार क्षेत्र में पानी, सिंचाई और सड़क परियोजनाओं को तेज़ करने का अनुरोध किया।
● टूरिज़्म कनेक्टिविटी
मुख्यमंत्री ने पर्यटन विकास के लिए इंटर-स्टेट टूरिज़्म सर्किट की मांग की।
बैठक के पश्चात मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा—
“यह बैठक विभिन्न राज्यों के बीच सहयोग को नई दिशा देने में सफल रही है। राजस्थान निरंतर समन्वय के साथ अपने विकास की यात्रा को आगे बढ़ा रहा है और मोदी सरकार के Developed India @ 2047 लक्ष्य को प्राप्त करने में पूरी भूमिका निभाएगा।”
उन्होंने अमित शाह का आभार जताते हुए कहा कि उत्तर क्षेत्रीय परिषद राज्यों को जोड़ने वाला एक प्रभावी मंच है जिसने इस बार कई ऐतिहासिक निर्णयों का मार्ग प्रशस्त किया है।
32वीं उत्तर क्षेत्रीय परिषद की बैठक कई मायनों में यादगार रही।
इसमें न सिर्फ अंतरराज्यीय सहयोग को मजबूती मिली, बल्कि आने वाले वर्षों में उत्तर भारत के विकास की दिशा भी तय हुई।








