कोलकाता के ईडन गार्डंस में साउथ अफ्रीका के हाथों मिली 66 वर्षों में सबसे बड़ी और शर्मनाक हार ने टीम इंडिया के आत्मविश्वास को गहरी चोट पहुंचाई है। स्पिन ट्रैक पर भारतीय बल्लेबाजों की नाकामयाबी ने सभी को सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया है। पहली पारी में 200 और दूसरी पारी में 100 रन भी पार न कर पाना टीम की तैयारी और चयन दोनों पर गंभीर प्रश्न उठाता है। ऐसे माहौल में गुवाहाटी में खेले जाने वाले दूसरे टेस्ट से पहले टीम इंडिया पर एक और बड़ा झटका लगा है—टीम के सबसे भरोसेमंद और फॉर्म में चल रहे बल्लेबाज शुभमन गिल चोटिल होकर टूर्नामेंट से बाहर हो गए हैं।
कोलकाता टेस्ट की दोनों इनिंग्स में गिल बल्लेबाजी करने भी नहीं उतर पाए थे। उनकी चोट को लेकर टीम मैनेजमेंट ने शुरुआती जानकारी तो दी, लेकिन यह उम्मीद थी कि शायद गुवाहाटी तक वे फिट हो जाएँगे। मगर रिपोर्ट्स में यह साफ हो गया कि गिल की स्थिति में सुधार नहीं हुआ और उन्हें टीम से बाहर होना पड़ा। अब उनके स्थान पर किसे प्लेइंग इलेवन में शामिल किया जाएगा, यह टीम मैनेजमेंट के लिए एक बड़ा सवाल बन चुका है।
यही वह मोड़ है जहां चयन प्रक्रिया पर विवाद और बढ़ गया है। एक दिग्गज पूर्व भारतीय क्रिकेटर ने सलाह दी थी कि टीम में बाएं हाथ के बल्लेबाजों की अत्यधिक संख्या को देखते हुए दाएं हाथ के किसी मजबूत घरेलू क्रिकेटर को मौका दिया जाए। इस सलाह के तहत तीन नाम स्पष्ट रूप से सामने आए थे—सरफराज खान, करुण नायर और अभिमन्यु ईश्वरन। तीनों खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट में लगातार रनों का अंबार लगा रहे हैं और टेस्ट क्रिकेट के लिए उपयुक्त माने जाते हैं।
इन तीनों को टीम में शामिल करने की वकालत इसलिए भी मजबूत थी क्योंकि टीम इंडिया के टॉप-ऑर्डर में बाएं हाथ के बल्लेबाजों की अधिकता के कारण विपक्षी टीम को गेंदबाजी योजनाएं बनाने में आसानी हो रही थी। दाएं हाथ का एक मजबूत बल्लेबाज इस कमजोरी को दूर कर सकता था। लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार हेड कोच गौतम गंभीर और चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर इस सलाह से पूरी तरह सहमत नहीं दिखे और उन्होंने गिल जैसे अनफिट खिलाड़ी को भी टीम के साथ गुवाहाटी ले जाने का फैसला किया।
इस फैसले ने क्रिकेट विशेषज्ञों और प्रशंसकों के बीच असंतोष पैदा किया है। गिल के स्वास्थ्य और टीम संयोजन को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि जब टीम पहले ही इतने कम रनों पर ढेर होकर संघर्ष कर रही है, ऐसे में नई ऊर्जा और नए बल्लेबाजों को मौका देने से ही टीम का संतुलन सुधर सकता था। फिर सरफराज खान लगातार घरेलू क्रिकेट में रन बरसा रहे हैं और उन्हें लंबे समय से टेस्ट टीम में उचित मौका नहीं मिल रहा है। करुण नायर, जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में ट्रिपल सेंचुरी तक बनाई है, भी लंबे समय से चयनकर्ताओं की नजरों से दूर हैं। अभिमन्यु ईश्वरन तो लगातार साथ होने के बावजूद प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं पा सके हैं।
टीम मैनेजमेंट पर यह आरोप भी लगाया जा रहा है कि चयन प्रक्रिया में लगातार पारदर्शिता की कमी दिख रही है। दाएं हाथ के बल्लेबाज को शामिल करने का सुझाव इसलिए दिया गया था कि साउथ अफ्रीका के स्पिनर्स ने भारतीय टॉप ऑर्डर को एक ही एंगल पर परेशान किया। यदि करुण, सरफराज या ईश्वरन जैसे खिलाड़ी होते, तो संभव था कि विपक्षी गेंदबाजों को अपनी योजनाएं बदलनी पड़तीं।
गुवाहाटी टेस्ट अब भारत के लिए करो या मरो जैसा बन चुका है। पहला टेस्ट हारने के बाद यदि दूसरा मैच भी हाथ से निकलता है, तो सीरीज गंवाने का खतरा बढ़ जाएगा। ऐसे मुश्किल समय में टीम संयोजन और चयन रणनीति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। गिल की चोट ने टीम इंडिया को कमजोर किया है, लेकिन जरूरत इसका विकल्प खोजने की थी। क्या टीम मैनेजमेंट की यह जिद टीम इंडिया पर भारी पड़ेगी, इसका जवाब गुवाहाटी में सामने आएगा।
दूसरे टेस्ट से पहले हालात साफ संकेत दे रहे हैं कि भारतीय टीम इस समय अंदर और बाहर दोनों मोर्चों पर जूझ रही है—मैदान पर प्रदर्शन और मैदान के बाहर चयन विवाद, दोनों ही टीम के आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकते हैं। अब सबकी निगाहें गुवाहाटी टेस्ट पर टिकी हैं, जहां टीम इंडिया को हर हाल में जीत हासिल करनी होगी।








