संजय कपूर की 30,000 करोड़ की संपत्ति और वसीयत को लेकर उठे विवाद के बीच अब मामला और ज्यादा पेचीदा होता जा रहा है। बॉलीवुड अभिनेत्री करिश्मा कपूर के पूर्व पति संजय कपूर के निधन के बाद उनकी संपत्ति को लेकर कानूनी लड़ाई तेज हो चुकी है। संजय कपूर की दूसरी पत्नी प्रिया सचदेव कपूर और करिश्मा कपूर के बच्चों सहित कपूर परिवार के सदस्यों के बीच यह विवाद अब दिल्ली हाई कोर्ट में पहुंच चुका है। हाल ही करिश्मा कपूर के बच्चों की ओर से प्रिया के खिलाफ एक नई याचिका दायर की गई, जिसके बाद संजय की बहन मंधीरा कपूर द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने पूरे मामले को और तूल दे दिया।
मंधीरा कपूर ने सार्वजनिक रूप से प्रिया सचदेव पर आरोप लगाया कि उन्होंने जाली वसीयत तैयार कर संजय कपूर की पूरी संपत्ति पर कब्जा जमाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा था कि उनके भाई संजय की कोई वास्तविक वसीयत मौजूद नहीं है और प्रिया द्वारा पेश किया गया दस्तावेज पूरी तरह फर्जी है। मंधीरा ने इन आरोपों के साथ प्रिया को ‘फ्रॉड’ बताते हुए कहा कि उन्होंने परिवार से संपत्ति हड़पने की नीयत से धोखाधड़ी की है। इन आरोपों के बाद परिवार के भीतर तनाव और कानूनी लड़ाई दोनों तेजी से बढ़ गए।
इसी बीच गुरुवार, 20 नवंबर को प्रिया सचदेव ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखा और कहा कि विरासत में मिली या पति द्वारा दी गई संपत्ति का पत्नी के नाम होना न तो अनोखी बात है और न ही संदिग्ध। प्रिया ने कोर्ट को बताया कि कपूर परिवार में यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है। उनके अनुसार संजय कपूर ने अपनी वसीयत में जो निर्णय लिया, वह परिवार की पुरानी रीतियों और भरोसे का ही हिस्सा है। प्रिया की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव नायर ने कोर्ट में यह तर्क दिया कि संजय कपूर के पिता ने भी अपनी संपत्ति अपनी पत्नी के नाम छोड़ दी थी। ऐसे में संजय द्वारा पत्नी को संपत्ति सौंपना पूरी तरह स्वाभाविक पारिवारिक परंपरा का हिस्सा है, न कि कोई गड़बड़ी या संदिग्ध गतिविधि।
सुनवाई के दौरान प्रिया ने यह भी स्पष्ट किया कि वह संजय द्वारा छोड़ी गई संपत्ति को लेकर किसी तरह की गैरकानूनी गतिविधि में शामिल नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उन पर लगातार लगाए जा रहे आरोप व्यक्तिगत बदनाम करने की कोशिश हैं और इनसे कानूनी मामले की दिशा प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। प्रिया ने अदालत को बताया कि उन्हें संजय कपूर की संपत्ति का उत्तराधिकार उसी प्रकार मिला है, जैसे परिवार की पिछली पीढ़ियों में होता आया है, और इसमें किसी तरह की धोखाधड़ी या दबाव की कोई बात नहीं है।
उधर करिश्मा कपूर के बच्चे इस वसीयत की वैधता पर सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने याचिका में कहा है कि संजय कपूर की वास्तविक इच्छा क्या थी, यह साफ नहीं है और प्रिया ने इसे अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश की है। उनके वकीलों की दलील है कि संपत्ति के इतने बड़े हिस्से का एक ही व्यक्ति के नाम होना संदिग्ध परिस्थितियों को जन्म देता है, जिसकी न्यायिक जांच जरूरी है।
इस पूरे विवाद में कपूर परिवार के रिश्तों की खटास भी साफ दिखाई देने लगी है। संजय कपूर के निधन के बाद परिवार के सदस्यों के बीच तनाव बढ़ता गया है और अब मामला पूरी तरह कानूनी रूप ले चुका है। अदालत की अगली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि वसीयत की वैधता और संपत्ति पर अधिकार को लेकर कौन सा पक्ष कितना मजबूत है।
फिलहाल प्रिया सचदेव के कोर्ट में दिए गए बयान ने मामले को एक नया मोड़ दे दिया है। एक ओर करिश्मा कपूर के बच्चों और मंधीरा कपूर के आरोप हैं, तो दूसरी ओर प्रिया का दावा कि यह सब पारिवारिक परंपरा का हिस्सा है। अब अदालत के फैसले से ही तय होगा कि 30,000 करोड़ की यह विवादित संपत्ति किसके हिस्से में जाएगी और क्या सचमुच वसीयत वैध है या इसकी जांच आगे बढ़ेगी।








