मालेगांव (नाशिक) के ग्रामीण हिस्से में हुए एक दिल दहला देने वाले मामले ने पूरे इलाके में तीव्र आक्रोश और गहरा दुख मचा दिया है। 16 नवंबर की शाम को तीन साल की मासूम बच्ची के गायब होने की सूचना मिलने के बाद उसकी खोजबीन शुरू की गई, लेकिन कुछ ही घंटों बाद उसका शव एक मोबाइल टॉवर के पास झाड़ियों में बरामद किया गया। इस घटना को दुष्कर्म के बाद हत्या का मामला बताया गया है, और अब आरोपी की पुलिस हिरासत को बढ़ाने पर स्थानीय लोगों में नाराज़गी चरम पर पहुंच गई है।
पुलिस ने बताया है कि बच्ची आखिरी बार घर के पास खेल रही थी, जब वह अचानक अदृश्य हो गई। उसके माता-पिता ने उसकी खोजबीन की परंतु नाकाम रहे और लगभग एक घंटे बाद पुलिस को सूचना दी। बच्चों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, एक व्यक्ति ने उसके साथ खेलने वाले अन्य बच्चों की मौजूदगी में उसे चॉकलेट का लालच देकर अपने साथ ले जाने की कोशिश की थी। इस सूचना पर पुलिस ने जांच तेज की, और आरोपी को गिरफ़्तार कर हिरासत में लिया। बाद में आरोपी द्वारा पूछताछ में कथित अपराध स्वीकार किए जाने की जानकारी सामने आई है।
आरोपी की पुलिस हिरासत को कोर्ट ने बढ़ा दिया है। हाई-स्लॉजनों और प्रदर्शनकारियों के दबाव के बीच अदालत ने आरोपी को पुलिस हिरासत में 27 नवंबर तक रिमांड पर रखने का आदेश दिया। इस फैसले पर स्थानीय लोगों ने राहत की प्रतिक्रिया व्यक्त की, क्योंकि वे चाहते हैं कि न्याय प्रक्रिया जल्द से जल्द आगे बढ़े और दोषी को कड़ी सज़ा मिले।
प्रदर्शनकारियों ने मालेगांव कैंप, मुसम पुल और सत्र न्यायालय के बाहर विरोध जताया। कोर्ट परिसर में भारी पुलिस तैनाती के बावजूद भीड़ शांत नहीं हुई, और अदालत को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए सुनवाई करनी पड़ी। स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने न्याय की मांग को जोर-शोर से उठाया। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बच्चों के प्रति समाज की जिम्मेदारी पहले से कहीं ज्यादा होनी चाहिए।
इस बीच, राज्य के जल संसाधन मंत्री गिरिश महाजन और मराठा समुदाय के कामकाजी नेता मनोज जरांगे पीड़ित परिवार से मिलने मालेगांव पहुंचे। उन्होंने संवेदना व्यक्त की और दोषी को सख्त से सख्त सजा दिलाने की प्रतिबद्धता जताई। वहीं, महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चकंकर भी पीड़ित परिवार से मिलने की योजना बना रही हैं और कहा है कि आयोग पूरी न्यायिक और मानवीय सहायता प्रदान करेगा।
पीड़ित परिवार की मांग है कि इस मामले को फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सुनवाई के लिए भेजा जाए और दोषी को अधिकतम सज़ा मिले। गांव के लोग दोषी के लिए सार्वजनिक उदाहरण की मांग कर रहे हैं, ताकि ऐसी भयावह घटनाओं को भविष्य में रोका जा सके। परिवार का दर्द गहरा है—वे सिर्फ न्याय चाहते हैं, ताकि उनकी बेटी जैसी मासूम दोबारा ना सतह पर आये।
पुलिस ने बयान दिया है कि वे हर संभव जांच कर रही है। उन्होंने बताया कि गवाहों से साक्ष्य इकट्ठा किए जा रहे हैं, वीडियो फुटेज की पड़ताल जारी है, और पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक जांच पर ध्यान दिया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि वे आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़ेंगे और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करेंगे।
यह मामला सिर्फ एक दुष्कर्म-हत्या का मामला नहीं है, बल्कि समाज में बच्चों की सुरक्षा, पुलिस की त्वरित कार्रवाई और न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा जुड़ा हुआ है। मालेगांव के लोगों को उम्मीद है कि सरकार, न्यायपालिका और प्रशासन मिलकर दोषी को कठोरतम सज़ा देंगे और भविष्य में ऐसी त्रासदियों से निपटने के लिए कड़े कदम उठाएंगे।
यह दर्दनाक घटना न केवल मालेगांव बल्कि आसपास के इलाकों में भी चिंता का विषय बन चुकी है। लोगों का कहना है कि बच्चों को बाहर खेलने की आज़ादी तो होनी चाहिए, पर उन्हें सुरक्षित वातावरण में बड़े होने का हक भी मिलना चाहिए। इस घटना ने फिर एक बार यह याद दिलाया है कि हमें अपने समाज में मासूमों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से लेना होगा।








