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  • बॉम्बे हाईकोर्ट का निर्देश: बिना QR कोड वाले होर्डिंग्स हटाने की सिफारिश, मुंबई की सड़कों पर हो सकता है बड़ा बदलाव

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    मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने शहर में लगे होर्डिंग्स को लेकर एक महत्वपूर्ण सिफारिश जारी की है। कोर्ट ने कहा है कि जिन होर्डिंग्स पर QR कोड नहीं लगे हैं, उन्हें हटाने पर विचार किया जाना चाहिए। कोर्ट का यह निर्देश डिजिटल निगरानी और सार्वजनिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से लिया गया है। इस फैसले के बाद मुंबई की सड़कों पर लगे बड़े-बड़े होर्डिंग्स और विज्ञापन बोर्डों की स्थिति में बड़ा बदलाव आ सकता है।

    कोर्ट ने कहा कि QR कोड के माध्यम से शहर प्रशासन और कानून प्रवर्तन एजेंसियां आसानी से विज्ञापन या होर्डिंग की जानकारी डिजिटल रूप में ट्रैक कर सकती हैं। इससे न केवल नियमों का पालन सुनिश्चित होगा बल्कि किसी भी अवैध या गैरकानूनी गतिविधि की जांच भी आसान होगी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह भी जोर दिया कि यदि कोई होर्डिंग बिना QR कोड के दिखाई देता है, तो उसे हटाने की प्रक्रिया को तेजी से लागू किया जाना चाहिए।

    हाईकोर्ट की यह सिफारिश मुंबई नगर निगम और संबंधित विभागों के लिए निर्देशात्मक है। कोर्ट ने कहा कि यह कदम न केवल डिजिटल ट्रैकिंग के लिए जरूरी है बल्कि शहर के सार्वजनिक स्थल और सड़कों की साफ-सफाई और नियमन के लिए भी अहम है। वर्तमान में शहर में कई बड़े होर्डिंग्स ऐसे हैं जो नियमों के अनुसार QR कोड नहीं लगवाते हैं। इन होर्डिंग्स के कारण नागरिकों के लिए सूचना प्राप्त करना और कानूनी निगरानी करना कठिन हो गया है।

    कोर्ट ने यह भी कहा कि डिजिटल निगरानी और QR कोड आधारित व्यवस्था से विज्ञापन देने वाले और होर्डिंग एजेंसियों दोनों के लिए पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। इससे यह भी पता चल सकेगा कि कौन सी एजेंसी ने किस स्थान पर विज्ञापन लगाया है और क्या वह कानूनी नियमों के अनुरूप है या नहीं। इस कदम से मुंबई में होर्डिंग्स की अवैध स्थिति पर भी काबू पाया जा सकेगा।

    शहर के नागरिकों ने इस कदम का स्वागत किया है। कई लोग मानते हैं कि मुंबई में होर्डिंग्स की बढ़ती संख्या और अव्यवस्थित स्थिति वर्षों से समस्या रही है। QR कोड के माध्यम से प्रशासन को इस पर नियंत्रण मिलना न केवल नियमों के पालन को आसान बनाएगा, बल्कि शहर के वातावरण और सड़क सुरक्षा के लिए भी फायदेमंद साबित होगा।

    वहीं, विज्ञापन और होर्डिंग एजेंसियों ने भी कोर्ट के निर्देश पर ध्यान देने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि अगर QR कोड आधारित व्यवस्था लागू होती है, तो यह शहर में विज्ञापन उद्योग के लिए पारदर्शिता और नियमन दोनों लाएगी। हालांकि, एजेंसियों ने यह भी कहा कि इसके लिए समय और संसाधनों की आवश्यकता होगी, ताकि सभी पुराने और नए होर्डिंग्स को QR कोड से लैस किया जा सके।

    इस आदेश के बाद मुंबई में होर्डिंग्स और बिलबोर्ड उद्योग की निगरानी प्रणाली में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। कोर्ट ने अधिकारियों से कहा कि QR कोड के साथ सभी नए और पुराने होर्डिंग्स का रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित किया जाए। डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली के जरिए यह भी पता लगाया जा सकेगा कि कौन से विज्ञापन नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं और कौन से कानूनी रूप से मंजूरी प्राप्त हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम शहर में नियमों के पालन और डिजिटल निगरानी की दिशा में एक बड़ा कदम है। QR कोड आधारित निगरानी से नागरिकों को भी यह सुविधा होगी कि वे किसी भी होर्डिंग के बारे में ऑनलाइन जानकारी प्राप्त कर सकेंगे और जरूरत पड़ने पर शिकायत भी दर्ज कर सकते हैं। इससे नागरिकों की भागीदारी बढ़ेगी और शहर में अव्यवस्था कम होगी।

    मुंबई की सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर लगे बड़े-बड़े होर्डिंग्स और विज्ञापन बोर्ड शहर की सुंदरता और नियमों के पालन के लिए हमेशा एक चुनौती रहे हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट की यह सिफारिश निश्चित रूप से शहर में पारदर्शिता, डिजिटल निगरानी और सुरक्षा के मानकों को बढ़ाने में मदद करेगी। आने वाले महीनों में प्रशासन की कार्रवाई और डिजिटल ट्रैकिंग के प्रभाव से यह देखा जाएगा कि मुंबई के दृश्य और होर्डिंग्स की व्यवस्था में कितना बदलाव आता है।

    इस फैसले के बाद, मुंबई के नागरिक, प्रशासन और विज्ञापन उद्योग सभी की निगाहें अब QR कोड आधारित निगरानी के प्रभाव और इसके कार्यान्वयन पर टिक गई हैं।

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