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  • एनडीए पास‑आउट परेड में दीपक कंडपाल को राष्ट्रपति गोल्ड मेडल, पुणे में बनी प्रेरणा की मिसाल

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    पुणे: हाल ही में आयोजित एनडीए (National Defence Academy) पास‑आउट परेड में उत्तराखंड के युवक दीपक कंडपाल ने अपनी असाधारण उपलब्धियों के लिए राष्ट्रपति गोल्ड मेडल प्राप्त किया। यह पुरस्कार उन्हें उत्कृष्ट प्रदर्शन और अनुशासन में सर्वोत्तम रहने के लिए दिया गया। दीपक की कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है, विशेषकर पुणे में, जहां उनकी उपलब्धि की चर्चा हर तरफ हो रही है।

    दीपक कंडपाल ने एनडीए में अपने प्रशिक्षण के दौरान निरंतर मेहनत और समर्पण का परिचय दिया। उनका दिन‑प्रतिदिन का अनुशासन, शारीरिक और मानसिक मजबूती, और नेतृत्व कौशल उन्हें अपने सहपाठियों में अलग पहचान दिलाने में मददगार साबित हुआ। अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रपति गोल्ड मेडल केवल तकनीकी या शारीरिक प्रदर्शन के लिए नहीं, बल्कि नेतृत्व क्षमता, टीम भावना और उच्च नैतिक मूल्यों के लिए दिया जाता है, और दीपक ने इन सभी क्षेत्रों में उत्कृष्टता दिखाई।

    उत्तराखंड के छोटे से जिले से आने वाले दीपक की यह उपलब्धि यह दर्शाती है कि दृढ़ निश्चय और मेहनत से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उनकी कहानी युवाओं को प्रेरित करती है कि परिस्थितियों से हार मानने के बजाय लगातार प्रयास और अनुशासन से सफलता प्राप्त की जा सकती है। दीपक के परिवार और उनके शिक्षक भी उनकी इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहे हैं।

    पुणे में उनके प्रेरक योगदान और उपलब्धियों को लेकर कई शिक्षण संस्थानों और स्थानीय मीडिया में चर्चा हो रही है। युवाओं को सेना में करियर बनाने और उत्कृष्टता के लिए मेहनत करने के लिए प्रेरित करने के लिए उनके अनुभव और संघर्ष की कहानी साझा की जा रही है। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे उदाहरण समाज में सकारात्मक ऊर्जा फैलाते हैं और नई पीढ़ी को अपने लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्ध बनाने में मदद करते हैं।

    एनडीए पास‑आउट परेड का आयोजन हर वर्ष होता है, जहां नए प्रशिक्षित अधिकारियों को सैन्य सेवा के लिए तैयार किया जाता है। इस समारोह में राष्ट्रपति और अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारी शामिल होते हैं और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कैडेट्स को विशेष पुरस्कार और पदक प्रदान किए जाते हैं। दीपक कंडपाल ने इस प्रतिष्ठित समारोह में सर्वोच्च प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रपति गोल्ड मेडल हासिल किया, जो उनके कठिन परिश्रम और नेतृत्व क्षमता का प्रमाण है।

    दीपक कंडपाल का कहना है कि यह पुरस्कार उनके लिए केवल सम्मान नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का प्रतीक भी है। उन्होंने बताया कि उनका लक्ष्य देश की सेवा में पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करना है। उनका दृढ़ संकल्प और अनुशासन भविष्य में अन्य युवा कैडेट्स के लिए भी मार्गदर्शन का काम करेगा।

    इस तरह, दीपक कंडपाल की उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड और पूरे भारत के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बन गई है। पुणे समेत देश के विभिन्न हिस्सों में उनकी कहानी को उत्साह और प्रेरणा के रूप में साझा किया जा रहा है। उनके उदाहरण से यह स्पष्ट होता है कि मेहनत, अनुशासन और समर्पण से किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है, और सफलता निश्चित रूप से मिलती है।

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