महाराष्ट्र के बुनियादी ढांचे के विकास को नई रफ्तार देते हुए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में नाशिक–सोलापुर–अक्कलकोट के बीच प्रस्तावित 374 किलोमीटर लंबे 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर को मंजूरी दे दी गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर 19,142 करोड़ रुपये की लागत आएगी और इसे बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT – टोल) मॉडल पर विकसित किया जाएगा।
इस परियोजना के पूरा होने के बाद नाशिक से अक्कलकोट तक का सफर, जो अभी करीब 31 घंटे में तय होता है, वह घटकर लगभग 14 घंटे रह जाएगा। यानी यात्रा समय में करीब 45 प्रतिशत की कमी आएगी, जो आम यात्रियों के साथ-साथ व्यापार और उद्योग जगत के लिए भी एक बड़ी राहत साबित होगी।
यह ग्रीनफील्ड कॉरिडोर पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत एक महत्वपूर्ण परियोजना मानी जा रही है। इसका उद्देश्य देश में एकीकृत और मल्टी-मॉडल परिवहन नेटवर्क को मजबूत करना है। नाशिक, अहिल्यानगर, सोलापुर जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ने वाला यह कॉरिडोर आगे चलकर कर्नूल तक सीधा संपर्क प्रदान करेगा, जिससे पश्चिमी तट से लेकर पूर्वी तट तक निर्बाध परिवहन संभव हो सकेगा।
इस परियोजना के जरिए महाराष्ट्र की कनेक्टिविटी न केवल राज्य के भीतर बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक नेटवर्क से भी और मजबूत होगी।
प्रस्तावित नाशिक–सोलापुर–अक्कलकोट कॉरिडोर को कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मार्गों और एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा। यह मार्ग वडाला बंदर इंटरचेंज के पास दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा। वहीं नाशिक में राष्ट्रीय राजमार्ग-60 (आडेगांव जंक्शन) पर इसे आगरा–मुंबई कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा।
इसके अलावा पांगरी (नाशिक के पास) इस कॉरिडोर का सीधा कनेक्शन समृद्धि महामार्ग से होगा। यह नेटवर्क महाराष्ट्र को चेन्नई बंदरगाह की दिशा में भी बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। चेन्नई से हसापुर (महाराष्ट्र सीमा) तक 700 किलोमीटर लंबा चार लेन मार्ग पहले से ही निर्माणाधीन है, जिससे यह कॉरिडोर राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स के लिहाज से बेहद अहम बन जाता है।
इस एक्सेस-कंट्रोल्ड 6-लेन ग्रीनफील्ड परियोजना का मुख्य उद्देश्य सड़क क्षमता को बढ़ाना और यात्रा को तेज, सुरक्षित और सुगम बनाना है। परियोजना के पूरा होने के बाद यात्रा दूरी में 201 किलोमीटर तक की कमी आएगी और यात्रा समय लगभग 17 घंटे तक घट जाएगा।
कॉरिडोर पर क्लोज टोलिंग सिस्टम लागू किया जाएगा और इसका डिज़ाइन स्पीड 60 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा रखा जाएगा। इससे यात्रियों और मालवाहक वाहनों को बिना रुकावट तेज गति से सफर करने की सुविधा मिलेगी।
यह कॉरिडोर नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NICDC) के कोप्पर्थी और ओरवाकल जैसे प्रमुख औद्योगिक नोड्स से जुड़ने वाला है। इससे माल ढुलाई की लागत में कमी आएगी और लॉजिस्टिक्स क्षमता में बड़ा सुधार होगा।
नाशिक–तालेगांव दिघे सेक्शन को भविष्य में पुणे–नाशिक एक्सप्रेसवे के विकास की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे उद्योगों, कृषि उत्पादों और निर्यात गतिविधियों को सीधा लाभ मिलेगा।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना से रोजगार के बड़े अवसर भी पैदा होंगे। अनुमान के मुताबिक, इस परियोजना से लगभग 251.06 लाख मानव-दिवस का प्रत्यक्ष रोजगार और 313.83 लाख मानव-दिवस का अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होगा।
इसके अलावा, कॉरिडोर के आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने से होटल, वेयरहाउसिंग, ट्रांसपोर्ट, छोटे उद्योग और सेवा क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इससे नाशिक, अहिल्यानगर, धाराशिव और सोलापुर जिलों के समग्र आर्थिक विकास को नई दिशा मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि नाशिक–सोलापुर–अक्कलकोट ग्रीनफील्ड कॉरिडोर महाराष्ट्र के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में एक मील का पत्थर साबित होगा। यह परियोजना न केवल यात्रा को आसान बनाएगी, बल्कि राज्य की आर्थिक क्षमता, निवेश आकर्षण और औद्योगिक विस्तार को भी मजबूती देगी।
कुल मिलाकर, मोदी सरकार का यह 19 हजार करोड़ रुपये का मास्टरस्ट्रोक महाराष्ट्र को तेज, सुरक्षित और आधुनिक परिवहन नेटवर्क की ओर ले जाने वाला एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।








