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  • Pax Silica क्या है? भारत को क्यों अमेरिका इस तकनीकी पहल में शामिल करना चाहता है

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    अमेरिका ने Pax Silica नामक एक वैश्विक तकनीकी और आपूर्ति श्रृंखला पहल में भारत को पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल होने का निमंत्रण देने की घोषणा की है। यह घोषणा अमेरिका के नए भारत राजदूत सर्जियो गोर ने नई दिल्ली में की, जिससे संकेत मिलता है कि अमेरिका-भारत के बीच व्यापार और रणनीतिक सहयोग में दरारें कम हो रही हैं।

    Pax Silica क्या है?

    Pax Silica एक अमेरिका-नेतृत्व वाला अंतरराष्ट्रीय गठबंधन है, जिसका उद्देश्य दुनिया भर में सिलिकॉन, अर्धचालक (सेमिकंडक्टर), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अवसंरचना और महत्वपूर्ण तकनीकी सामग्री की सुरक्षित, निर्यात-आधारित एवं नवाचार-उन्मुख आपूर्ति श्रृंखला तैयार करना है। यह पहल उन देशों को जोड़ती है जो अमेरिका के साथ तकनीकी और आर्थिक रूप से “विश्वसनीय” साझेदार माने जाते हैं।

    क्यों है Pax Silica की स्थापना?

    इस पहल का मूल उद्देश्य वैश्विक तकनीकी आपूर्ति-शृंखलाओं को सुरक्षित बनाकर उन्हें ऐसे देशों से संरक्षित करना है जिन्हें अमेरिका संभावित प्रतिद्वंद्वी या “संभावित जोखिम” मानता है, खासकर चीन जैसे देशों की बढ़ती तकनीकी पकड़ के खिलाफ। इसके तहत AI, सेमिकंडक्टर, उन्नत विनिर्माण, ऊर्जा संसाधन, और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की योजना है।

    भारत की भूमिका और आमंत्रण

    हाल ही तक Pax Silica समूह में भारत को शामिल नहीं किया गया था, जबकि जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, नीदरलैंड, यूके, इज़राइल, यूएई तथा ऑस्ट्रेलिया जैसे देश पहले से इस पहल में हैं। अब अमेरिका ने घोषणा की है कि अगले महीने भारत को पूर्ण सदस्य के रूप में आमंत्रित किया जाएगा, जो वैश्विक तकनीकी मानचित्र पर भारत की महत्ता को दर्शाता है।

    भारत का इससे पहले बाहर रहना

    पिछले साल Pax Silica के प्रारंभिक घोषणा-समित में भारत को शामिल नहीं किया गया था, जिससे कुछ विश्लेषकों ने यह देखा कि यह व्यापार समझौते में अनिश्चितता और राजनीतिक मतभेद का परिणाम हो सकता है। उस समय कांग्रेस सहित कुछ भारतीय राजनीतिक दलों ने सवाल उठाया था कि भारत का बाहर रहना “एक अवसर का नुकसान” साबित हो सकता है।

    भारत के लिए क्या मायने रखता है Pax Silica?

    विशेषज्ञों के मुताबिक, Pax Silica में शामिल होने से भारत को

    • वैश्विक सेमिकंडक्टर और AI आपूर्ति-शृंखला में भागीदारी बढ़ाने में मदद मिलेगी,

    • प्रौद्योगिकी निवेश और साझेदारी के अवसर मिल सकते हैं,

    • तथा चीन के प्रभुत्व वाले बाजारों पर सामरिक संतुलन बनाने में समर्थन मिलेगा।
      यह कदम भारत-यूएस रिश्तों को तकनीकी, आर्थिक, और रणनीतिक स्तर पर और मजबूत करेगा।

    क्या यह चीन के खिलाफ कदम है?

    Pax Silica को कई विश्लेषकों ने चीन की तकनीकी और विनिर्माण शक्ति को संतुलित करने वाली पहल के रूप में देखा है। इससे अमेरिका को उन देशों के साथ सहयोग का मौका मिलता है जो “विश्वसनीय और लोकतांत्रिक” तकनीकी भागीदार माने जाते हैं, जबकि चीन के प्रभुत्व वाले क्षेत्रों पर सीमित निर्भरता बनानी है।

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