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महाराष्ट्र के पलघर जिले में प्रस्तावित वाढवण बंदर (Vadhavan Port) परियोजना के खिलाफ स्थानीय लोगों और समुदायों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया है। हजारों मछुआरे, किसान, आदिवासी, महिलाएँ और युवा समुद्री पारिस्थितिकी तथा अपनी आजीविकाएँ बचाने के लिये सड़कों पर उतरे। विरोधियों का कहना है कि यह परियोजना क्षेत्र के पर्यावरण और पारंपरिक जीविकोपार्जन को गंभीर रूप से प्रभावित करेगी।
स्थानीय समूह वाढवण बांधर विरोधी संघर्ष समिति (VBVSS) के नेतृत्व में लगभग 20,000 से अधिक लोग पालघर रेलवे स्टेशन से जिल्हा कलेक्टर कार्यालय तक लगभग 4–5 किलोमीटर तक मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि बढ़वण बंदर सहित अन्य मेगा परियोजनाओं की योजनाओं को रद्द किया जाए। वे परियोजना के खिलाफ एक विस्तृत ज्ञापन भी जिल्हा प्रशासन को सौंपा।
विरोधी कहते हैं कि समुद्र के अंदर भूमि का पुनःपूर्ति और लगभग 4,000 एकड़ भूमि पर निर्माण कार्य से कृषि भूमि, मछली पालन, नमक के खेत और वन क्षेत्र नष्ट होने की आशंका है, जिससे स्थानीय समुदायों की आजीविका डिग सकती है। उन्होंने दावा किया कि मछुआरों के लिये प्रतिबंधित क्षेत्रों (जहाँ अब मछली पकड़ने पर रोक लग सकती है) के कारण हजारों परिवार अपनी आजीविका खो देंगे।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि परियोजना के सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों का पर्याप्त आकलन नहीं किया गया है और लोगों की राय को ठीक से नहीं लिया गया है। ग्रामीणों ने संकेत दिया कि यह कोस्टल क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से मछली उत्पादन के लिये ‘गोल्डन बेल्ट’ के रूप में जाना जाता है और यह परियोजना समुद्री पारिस्थितिकी को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।
विरोध के बीच, स्थानीय लोगो ने पर्यावरण सुरक्षा नियमों, संवैधानिक अधिकारों और पारंपरिक आजीविका के संरक्षण जैसे मुद्दों पर सरकार से स्पष्ट जवाब देने की मांग की है। अगर सरकार उनकी मांगों को लिखित रूप से स्वीकार नहीं करती है तो उन्होंने आंदोलन को तेज करने की चेतावनी भी दी है।





