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  • ग्रामीण भारत के भविष्य की नींव रखता बाजड ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स

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    संवेदनशीलता, संघर्ष और उद्देश्य की मजबूत नींव पर खड़ा एक सपना ही सच्ची शिक्षा को जन्म देता है। इसी विचार को साकार करते हुए राधेश्याम बाबनराव बाजड ने ग्रामीण महाराष्ट्र में शिक्षा की दिशा बदलने का कार्य किया। आज उनका शैक्षणिक उद्यम ‘बाजड ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स’ गुणवत्तापूर्ण, मूल्य-आधारित और समावेशी शिक्षा का एक भरोसेमंद नाम बन चुका है।

    ग्रामीण क्षेत्र से शुरू हुई प्रेरणादायी यात्रा

    बाजड ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स का संचालन स्व. सखारामजी बाजड बहुउद्देशीय ग्राम विकास संस्था, नेरतालसा के अंतर्गत किया जा रहा है। इस संस्था का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि शिक्षा को दृष्टि, त्याग, दूरदर्शिता और सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ना है। ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए यह संस्था आज एक सशक्त शैक्षणिक केंद्र के रूप में उभर चुकी है।

    शिक्षा से अनुभव तक: राधेश्याम बाजड का सफर

    संस्था के संस्थापक श्री राधेश्याम बाबनराव बाजड ने वर्ष 2010 से 2014 के दौरान फूड टेक्नोलॉजी में बी-टेक की पढ़ाई पूरी की। इसी दौरान परभणी स्थित ज्ञानज्योति गुरुकुल में अध्ययन के साथ-साथ प्रबंधन का अनुभव प्राप्त किया। इस अनुभव ने उन्हें ग्रामीण विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों की शैक्षणिक, आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों को समझने का अवसर दिया।

    ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कमी के कारण बच्चों को परभणी, लातूर जैसे शहरों की ओर पलायन करना पड़ता था, जिससे परिवारों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ता था। इसी सच्चाई ने राधेश्याम बाजड को यह सोचने पर मजबूर किया कि गुणवत्तापूर्ण और आवासीय शिक्षा गांव या जिले के भीतर ही उपलब्ध होनी चाहिए

    शिक्षक से शिक्षाविद् तक           

    बी-टेक के बाद उन्होंने 2015 से 2017 के बीच एम-टेक की पढ़ाई पूरी की। इसके पश्चात उन्होंने उदगीर स्थित अन्नतंत्रज्ञान महाविद्यालय में सहायक प्राध्यापक और पुसद स्थित दुग्धतंत्रज्ञान महाविद्यालय में वरिष्ठ शोध सहायक के रूप में कार्य किया। इस दौरान उन्हें अध्यापन, शोध और प्रशासनिक कार्यों का समृद्ध अनुभव प्राप्त हुआ।

    जीवनसाथी का साथ, सपनों को मिला आधार

    वर्ष 2020 में श्री राधेश्याम बाजड का विवाह श्रीमती छाया बाजड से हुआ। उन्होंने न केवल जीवनसाथी के रूप में बल्कि शैक्षणिक मिशन में एक मजबूत आधार स्तंभ की भूमिका निभाई।

    ज्ञानसंगम गुरुकुल: एक साहसिक शुरुआत

    वर्ष 2022 में ग्रामीण शिक्षा की स्थिति ने एक बार फिर उन्हें झकझोर दिया। इस बार उन्होंने केवल विचार नहीं किया, बल्कि अपनी पत्नी के साथ मिलकर गुरुकुल पद्धति से शिक्षा प्रदान करने का साहसिक निर्णय लिया।

    अप्रैल 2022 में वाशिम जिले में सहयोगियों और ग्रामवासियों के सहयोग से “ज्ञानसंगम गुरुकुल” की स्थापना की गई, जो बाजड ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स की आधारशिला बना।

    पीएचडी और संघर्ष का दौर         

    इसी दौरान राधेश्याम बाजड को आंध्र प्रदेश स्थित विश्वविद्यालय में पीएचडी में प्रवेश मिला। गुरुकुल की शुरुआत के दो माह बाद ही उन्हें अध्ययन के लिए स्थानांतरित होना पड़ा। ऐसे में गुरुकुल की पूरी जिम्मेदारी श्रीमती छाया बाजड ने संभाली। रसोई से लेकर कक्षा प्रबंधन, विद्यार्थियों की सुरक्षा, अनुशासन और अभिभावक संवाद—हर जिम्मेदारी उन्होंने 24×7 समर्पण के साथ निभाई।

    पहला वर्ष संघर्षपूर्ण रहा, लेकिन इसी संघर्ष ने ज्ञानसंगम गुरुकुल की नींव को मजबूत किया।

    विस्तार की ओर कदम

    दूसरे वर्ष आर्थिक और प्रशासनिक चुनौतियां सामने आईं, लेकिन सकारात्मक सोच और निरंतर प्रयासों से संस्था ने इन बाधाओं को पार किया। इसी दौरान गुरुकुल को नए भवन में स्थानांतरित किया गया और “बाजड कोचिंग क्लासेस, वाशिम” की शुरुआत हुई।

    आज ज्ञानसंगम गुरुकुल और बाजड कोचिंग क्लासेस में 55 से 65 विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

    नई पहल, नया भविष्य

    तीन वर्षों की सफल यात्रा के बाद चौथे वर्ष में संस्था ने नेरतालसा में दो नई शैक्षणिक पहल शुरू कीं—

    • ज्ञानकुंज कोचिंग क्लासेस, नेरतालसा

    • ज्ञानसंगम प्री-प्राइमरी इंग्लिश स्कूल, नेरतालसा

    वर्तमान में ज्ञानकुंज कोचिंग क्लासेस में कक्षा 1 से 10 तक 60 से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। शैक्षणिक सत्र 2026–27 से ज्ञानसंगम प्री-प्राइमरी इंग्लिश स्कूल का संचालन भी शुरू होगा।

    ग्रामीण भारत के उज्ज्वल भविष्य की ओर

    आज बाजड ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स ग्रामीण महाराष्ट्र में गुणवत्तापूर्ण, किफायती और भरोसेमंद शिक्षा का प्रतीक बन चुका है। यह केवल एक संस्थान की सफलता नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ाया गया एक ठोस कदम है।

    संस्थापक राधेश्याम बाबनराव बाजड का सपना है कि अधिक से अधिक जरूरतमंद और होनहार विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचे और बाजड ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स एक आदर्श शैक्षणिक मॉडल के रूप में स्थापित हो। इसी लक्ष्य के साथ वे निरंतर समर्पण और परिश्रम करते जा रहे हैं।

    सम्मान और पहचान

    राधेश्याम बाबनराव बाजड की इस शानदार उपलब्धि को “Maharashtra Business Icon 2025 / Maharashtra Style Icon 2025 / Maharashtra Fashion Icon 2025” जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों के लिए चुना गया है। यह सम्मान Reseal.in और India Fashion Icon Magazine द्वारा उन उभरते उद्यमियों और रचनात्मक प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए दिया जाता है, जिन्होंने अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान दिया है।

    भव्य पुरस्कार समारोह

    इस पुरस्कार समारोह में कई प्रसिद्ध फिल्मी हस्तियाँ शामिल होंगी:
    वर्षा उसगांवकर – बॉलीवुड अभिनेत्री
    सोनाली कुलकर्णी – भारतीय अभिनेत्री
    प्रार्थना बेहेरे – भारतीय अभिनेत्री

    यह आयोजन श्री सुधीर कुमार पठाडे, Founder & CEO, Sure Me Multipurpose Pvt. Ltd. (Reseal.in) के नेतृत्व में आयोजित किया जाएगा, जो महाराष्ट्र के उद्यमियों और प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच देने के लिए कार्यरत हैं।

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