दोनगांव में जन्म लेकर जलगांव जिले में पली-बढ़ीं कल्याणी पाटील ने अपने संघर्ष, परिश्रम और सामाजिक सरोकारों के बल पर सफलता की एक प्रेरणादायी कहानी लिखी है। Kalyani Hair Oil की संस्थापक के रूप में पहचानी जाने वाली कल्याणी पाटील को Agrominist के रूप में सम्मानित किया गया, जिसे उन्होंने “अमृत पैटर्न अवॉर्ड” नाम दिया है।
कल्याणी पाटील कहती हैं कि उनके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी उनके माता-पिता द्वारा दिए गए संस्कार हैं। उनके पिता रवींद्र बाबुराव पाटील और माता के मार्गदर्शन ने ही उन्हें समाज के लिए कुछ करने की प्रेरणा दी। आज वे गरीब, जरूरतमंद और आत्महत्या से प्रभावित किसानों के लिए लगातार कार्य कर रही हैं, जिसका फल उन्हें किसानों के आशीर्वाद के रूप में मिल रहा है।
आज कल्याणी पाटील का नाम केवल गांव या जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र के साथ-साथ गुजरात, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश तक उनकी पहचान बन चुकी है। किसानों की लागत कम कर उत्पादन बढ़ाने और उन्हें कर्ज व आत्महत्या जैसी त्रासदी से बचाने के लिए वे लगातार प्रयासरत हैं। लाखों किसानों का विश्वास और आशीर्वाद उनके कार्य की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
इस पूरे सफर का श्रेय वे ‘अमृत पैटर्न’ के जनक डॉ. अमृतराव दादाराव देशमुख को देती हैं। डॉ. देशमुख ने डिग्री से अधिक अनुभव के आधार पर कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव किए। मिट्टी और पौधों की जरूरतों को समझकर खेती करने की जो सोच कल्याणी पाटील ने सीखी, वह उन्हें डॉ. देशमुख से ही मिली।
यवतमाल जैसे आत्महत्या-प्रभावित जिले में अमृत पैटर्न किसानों के लिए संजीवनी बनकर सामने आया है। एक एकड़ में 51 क्विंटल कपास उत्पादन, 12 से 14 फीट ऊँचे पौधे और बेहद कम लागत में खेती—ये सभी प्रयोग डॉ. देशमुख की दूरदर्शिता का परिणाम हैं। कपास में ‘बोलवर्म’ नहीं बल्कि ‘बोल रॉट’ की समस्या होने की बात उन्होंने अनुभव के आधार पर सिद्ध की और इस विषय को मंत्रालय तक पहुंचाया।
किसानों की सुविधा के लिए Amrut Pattern App विकसित किया गया है, जिससे कपास, तूर, सोयाबीन, चना, तरबूज, खरबूज सहित कई फसलों की संपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। इससे किसान सरल और वैज्ञानिक तरीके से खेती कर पा रहे हैं।
कल्याणी पाटील ने कर्ज में डूबे और परेशान किसानों से अपील की है कि वे अमृत पैटर्न ऐप डाउनलोड कर कम लागत में खेती करें और प्रगति की ओर बढ़ें। उन्होंने अपने प्राप्त सम्मान को पूर्ण रूप से डॉ. अमृतराव दादाराव देशमुख को समर्पित किया है।








