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नृत्य कभी निधि चौदसामा के लिए केवल एक करियर विकल्प नहीं था। यह उनके लिए आत्म-अभिव्यक्ति, आत्मविश्वास और पहचान का माध्यम था। स्कूल के दिनों में जब शब्द भावनाओं को व्यक्त करने में असमर्थ होते थे, तब नृत्य उनकी आवाज़ बनता था। उस समय शायद उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था कि यही जुनून एक दिन उनकी सबसे बड़ी शक्ति बन जाएगा।
स्कूल से कॉलेज तक: जुनून के साथ जिम्मेदारियों की राह
कॉलेज में प्रवेश के साथ ही निधि का परिचय ज़ुम्बा से हुआ—एक ऐसा डांस फॉर्म जिसने उन्हें आज़ादी का एहसास कराया। इसी दौरान परिवार पर गंभीर आर्थिक संकट भी आ गया। ज़िंदगी ने जिम्मेदारियों का बोझ दिया, लेकिन सपनों ने चुप रहना स्वीकार नहीं किया।
हार मानने के बजाय निधि ने आगे बढ़ने का फैसला किया। उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई के साथ-साथ डांस सिखाना शुरू किया और डेढ़ साल के ज़ुम्बा अंडर-ट्रेनिंग कोर्स में दाख़िला लिया।
संघर्ष भरे साल और आत्म-संदेह से लड़ाई
वह दौर आसान नहीं था—दिन में कॉलेज, बाकी समय ट्रेनिंग और क्लासेज़, लगातार दबाव और आत्म-संदेह। कई बार लगा कि सब छोड़ देना ही बेहतर होगा। लेकिन जैसे ही संगीत बजता, उन्हें याद आ जाता कि उन्होंने यह सफर क्यों शुरू किया था।
कॉलेज के अंतिम वर्ष में निधि ने साहसिक निर्णय लेते हुए लाइसेंस प्राप्त ज़ुम्बा ट्रेनिंग पूरी की। यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन यह खुद से किया गया एक मजबूत वादा था।
फ्रीलांस ज़ुम्बा इंस्ट्रक्टर से पहचान की शुरुआत
ग्रेजुएशन के बाद निधि ने फ्रीलांस ज़ुम्बा इंस्ट्रक्टर के रूप में काम शुरू किया। अगले तीन से चार वर्षों तक उन्होंने धैर्य, निरंतरता और ईमानदारी के साथ अपना करियर खड़ा किया।
यह सफर रातों-रात सफलता का नहीं था—बल्कि रोज़ खुद को साबित करने का था। कुछ दिन उत्साह से भरे होते, तो कुछ निराशा से, लेकिन निधि ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
कोविड-19: संकट जिसने रास्ता बदल दिया
फिर आया कोविड-19। स्टूडियो बंद हो गए, नियमित दिनचर्या टूट गई और अनिश्चितता छा गई। डर जरूर था, लेकिन रुकने का विकल्प नहीं।
निधि ने अपने ज़ुम्बा सेशंस ऑनलाइन शिफ्ट कर दिए—और यही फैसला उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट बना। उन्होंने न सिर्फ भारत के विभिन्न हिस्सों में बल्कि अमेरिका (टेक्सास, न्यूयॉर्क) और यूके तक क्लाइंट्स को ट्रेन करना शुरू किया।
ऑनलाइन सेशंस ने उन्हें आर्थिक संबल ही नहीं दिया, बल्कि आत्मविश्वास भी लौटाया। उन्हें एहसास हुआ कि जुनून की कोई सीमा नहीं होती।
स्टूडियो बंद हुआ, निधि बनी स्टूडियो ओनर
इसके बाद एक और चुनौती सामने आई। जिस स्टूडियो में निधि पढ़ा रही थीं, वह स्थायी रूप से बंद होने वाला था। एक बार फिर फैसला करना था—पीछे हटना या आगे बढ़ना।
निधि ने हिम्मत दिखाई और उसी स्टूडियो को अपने हाथ में लेकर उसकी मालिक बन गईं।
स्टूडियो ओनर बनना सिर्फ एक पद नहीं था—यह जिम्मेदारी, जोखिम और साहस का प्रतीक था। आज जब वे पीछे मुड़कर देखती हैं, तो उन्हें संघर्ष नहीं, बल्कि अपनी ताकत दिखाई देती है।
सफलता का अर्थ: खुद पर विश्वास
निधि चौदसामा की कहानी इस बात का प्रमाण है कि जब ज़िंदगी इम्तिहान लेती है, तब खुद पर विश्वास ही सबसे बड़ा हथियार होता है।
आज भी वे सीख रही हैं, आगे बढ़ रही हैं और नृत्य कर रही हैं—लेकिन एक बात उन्हें पूरी तरह स्पष्ट है:
उन्होंने सफलता का इंतज़ार नहीं किया, उन्होंने उसे खुद रचा।
सम्मान और पहचान
निधि चौदसामा की इस शानदार उपलब्धि को “Maharashtra Business Icon 2025 / Maharashtra Style Icon 2025 / Maharashtra Fashion Icon 2025” जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों के लिए चुना गया है। यह सम्मान Reseal.in और India Fashion Icon Magazine द्वारा उन उभरते उद्यमियों और रचनात्मक प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए दिया जाता है, जिन्होंने अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान दिया है।
भव्य पुरस्कार समारोह
इस पुरस्कार समारोह में कई प्रसिद्ध फिल्मी हस्तियाँ शामिल होंगी:
⭐ वर्षा उसगांवकर – बॉलीवुड अभिनेत्री
⭐ सोनाली कुलकर्णी – भारतीय अभिनेत्री
⭐ प्रार्थना बेहेरे – भारतीय अभिनेत्री
यह आयोजन श्री सुधीर कुमार पठाडे, Founder & CEO, Sure Me Multipurpose Pvt. Ltd. (Reseal.in) के नेतृत्व में आयोजित किया जाएगा, जो महाराष्ट्र के उद्यमियों और प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच देने के लिए कार्यरत हैं








