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भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौता (BTA) में कृषि, वानिकी और आजीविका‑से जुड़े फसलों को बढ़ावा देने को तीन मुख्य स्तंभों के रूप में रखा गया है। इन तीनों पर एक साथ ध्यान देना इस समझौते को रोज़गार, निर्यात और ग्रामीण आजीविका के लिये अधिक संतुलित और किसान‑हितैषी बनाने की कोशिश करता है।
विशेष रूप से यह तीन स्तंभ हैं:
🔹 1. प्रमुख कृषि उत्पादों पर निर्यात वृद्धि
🔹 2. वानिकी से जुड़े वस्तुओं का निर्यात मजबूत करना
🔹 3. भविष्य‑उन्मुख और आजीविका फसलों का समर्थन
पहला स्तंभ: कृषि आधारित निर्यात विस्तार
पहला स्तंभ उन उत्पादों पर केंद्रित है जिनमें भारत पहले से ही वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति रखता है। इसमें:
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समुद्री उत्पाद
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मसाले
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चाय‑कॉफी
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चावल
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फल‑फूल
इन वस्तुओं के लिए अमेरिका के बाजार में शून्य या कम शुल्क का अवसर मिलेगा, जिससे किसानों की आय और निर्यात संभावनाएँ बढ़ सकती हैं।
इस दिशा में भारत के निर्यात को 46 बिलियन डॉलर तक के बाजार तक पहुंचाने की योजना है, जो भारतीय कृषि को अमेरिकी आयातकों के बीच अधिक प्रतिस्पर्धी बनाता है।
दूसरा स्तंभ: वानिकी‑सम्बंधित उत्पादों का समर्थन
दूसरा स्तंभ वानिकी या फ़ॉरेस्ट्री‑आधारित वस्तुओं पर केंद्रित है। इसमें कुछ पारंपरिक कृषि की तुलना में अलग‑सा सेक्टर शामिल है, जैसे कि वनस्पति सैप इत्यादि, जिनका निर्यात अमेरिका को पहले से होता आया है।
इस पैटर्न के तहत वानिकी उत्पादों को कम या शून्य शुल्क तक पहुंच दिया जाता है, जिससे यह क्षेत्र आजीविका की विविधता प्रदान करने वाला स्रोत बन सकता है — विशेषकर उन समुदायों के लिये जो कृषि‑मुख्य नहीं हैं।
तीसरा स्तंभ: आजीविका‑फसलों और भविष्य‑मुखी कृषि वस्तुओं पर फोकस
तीसरा स्तंभ उन फसलों और कृषि वस्तुओं को सशक्त बनाना चाहता है जो परंपरागत मुख्य फसलों के अलावा ग्रामीण आजीविका के लिये महत्वपूर्ण हैं।
इनमें शामिल हैं:
🔹 प्रोसेस्ड फल उत्पाद
🔹 नारियल‑तेल तथा उससे बने उत्पाद
🔹 अन्य ‘आज की अफ़ोर्डेबल और भविष्य‑सक्षम’ वस्तुएँ.
इन वस्तुओं का अमेरिका में निर्यात बढ़ाने से छोटे‑स्तर के किसानों और महिलाओं‑नेतृत्व वाले उद्यमों के लिये आय के नए अवसर खुल सकते हैं।








