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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण को लेकर एक दृढ़ और साफ़ संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि बाबरी संरचना (Masjid) कयामत तक भी नहीं बनेगी, और जिनके मन में इस संबंध में कोई भी उम्मीद है, वे अपने सपने छोड़ दें। मुख्यमंत्री ने यह बयान एक सार्वजनिक समारोह में दोहराया।
योगी ने राम जन्मभूमि विवाद में BJP के पहले से घोषित रुख को याद करते हुए कहा कि पार्टी का लक्ष्य रामलला के स्थान पर मंदिर का निर्माण करना था और यह काम वहाँ ही पूरा हुआ—जिसे उन्होंने संस्कार और परंपरा का सम्मान बताया।
क्या कहा मुख्यमंत्री ने?
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मुख्यमंत्री ने लोगों से कहा कि जो लोग बाबरी मस्जिद को फिर से खड़ा करने की सोच रहे हैं, उनका सपना कभी सच नहीं होगा।
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उन्होंने क़ानून के शासन और समाज के नियमों का पालन करने की बात करते हुए कहा कि जो लोग नियमों का उल्लंघन करेंगे, उन्हें कठोर परिणामों का सामना करना पड़ेगा।
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मुख्यमंत्री ने भारत की सांस्कृतिक विरासत और सनातन धर्म का सम्मान बढ़ाने को भी ज़रूरी बताया।
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उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण अब एक साकार वास्तविकता बन चुका है और इससे सनातन संस्कृति को बल मिला है।
पृष्ठभूमि
बाबरी मस्जिद 1992 में ढहा दी गई थी, जिसके बाद दशकों तक भारत में यह धार्मिक और राजनीतिक विवाद का मुख्य मामला रहा। इस विवाद का समाधान 2019 में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के साथ हुआ, जिसमें राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के पक्ष में फैसला दिया गया। इसके बाद अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण कार्य पूरा हुआ और 25 नवंबर 2025 को वहाँ धर्म ध्वज भी फहराया गया।
सीएम आदित्यनाथ का ताज़ा बयान इसी पृष्ठभूमि में आया है, जहाँ वह यह स्पष्ट कर रहे हैं कि पुरानी मस्जिद का फिर से निर्माण नहीं होगा और राम जन्मभूमि विवाद को भविष्य में फिर से उभारने वाले सपने निराधार हैं।








