आज वे Aadishakti Engineering के संस्थापक हैं, जो पूरे भारत में अपनी सेवाएं दे रही है।
संघर्ष भरा बचपन
परमेश्वर का जन्म एक आर्थिक रूप से कमजोर किसान परिवार में हुआ। उनके माता-पिता खेतों में मजदूरी करते थे। स्कूल की छुट्टियों में वे भी परिवार की मदद के लिए मजदूरी करते थे।
कम उम्र से ही उन्होंने मेहनत को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लिया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की।
पहली नौकरी और व्यवसाय की शुरुआत
पढ़ाई के बाद उन्हें परभणी की एक कंपनी में ₹6,000 महीने की नौकरी मिली। उन्होंने काम के दौरान हर तकनीकी जानकारी ध्यान से सीखी।
बाद में एक दोस्त के साथ मिलकर उन्होंने खुद की फर्म शुरू की। शुरुआत अच्छी रही, लेकिन कुछ कारणों से साझेदारी टूट गई और वे फिर से शून्य पर आ गए।
हार नहीं मानी
इस कठिन समय में उन्होंने कुछ समय खेती का काम किया और बाद में ₹30,000 महीने की नौकरी शुरू की। लेकिन अपना व्यवसाय खड़ा करने का सपना कभी खत्म नहीं हुआ।
बिना किसी आर्थिक या राजनीतिक सहारे के उन्होंने अपने अनुभव और आत्मविश्वास के बल पर आगे बढ़ने का फैसला किया।
Aadishakti Engineering की स्थापना
5 नवंबर 2018 को उन्होंने Aadishakti Engineering की स्थापना की।
आज यह कंपनी पूरे भारत में काम कर रही है और सालाना लगभग ₹60 लाख का टर्नओवर हासिल कर चुकी है। जो व्यक्ति कभी ₹6,000 महीने कमाता था, वही आज ₹7–8 लाख महीना कमा रहा है।
तकनीकी क्षेत्र में विस्तार
सफलता के बाद उन्होंने Aadishakti Tech Solution नाम से दूसरा व्यवसाय भी शुरू किया, जिसने एक साल पूरा कर लिया है।
बड़ी कंपनियों के साथ काम
Aadishakti Engineering बिजली से चलने वाले एक्ट्यूएटर की सर्विसिंग और मरम्मत का काम करती है, जो पावर प्लांट, वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट, सीमेंट फैक्ट्री और अन्य उद्योगों में उपयोग होते हैं।
कंपनी ने कई प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथ काम किया है, जिनमें Larsen & Toubro, Adani Power, Tata Projects, Indian Oil Corporation जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं।
अंतरराष्ट्रीय पहचान का लक्ष्य
परमेश्वर वानखेडे का सपना अब अपनी कंपनी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का है। उनका मानना है कि जल्द ही Aadishakti Engineering भारत के बाहर भी अपनी सेवाएं देगी।
युवाओं के लिए संदेश
परमेश्वर शंकर वानखेडे की कहानी यह साबित करती है कि सफलता विरासत में नहीं मिलती, बल्कि संघर्ष, धैर्य और लगातार मेहनत से बनाई जाती है।
खेती मजदूर से राष्ट्रीय स्तर के उद्यमी बनने तक का उनका सफर लाखों युवाओं को यह विश्वास देता है कि सीमित साधनों के बावजूद भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं।